शनि की साढ़ेसाती · ♍ कन्या (Virgo)

कन्या राशि पर शनि की साढ़ेसाती

कन्या चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

अभी साढ़ेसाती या ढैया नहीं है। अगली साढ़ेसाती 27 अग॰ 2036 से शुरू होगी।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

कन्या राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

1 नव॰ 2006 – 2 नव॰ 2014

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणसिंह1 नव॰ 200610 जन॰ 2007
पहला चरणसिंह16 जुल॰ 200710 सित॰ 2009
दूसरा (मध्य) चरणकन्या10 सित॰ 200915 नव॰ 2011
तीसरा (अंतिम) चरणतुला15 नव॰ 201116 मई 2012
दूसरा (मध्य) चरणकन्या16 मई 20124 अग॰ 2012
तीसरा (अंतिम) चरणतुला4 अग॰ 20122 नव॰ 2014

27 अग॰ 2036 – 30 अग॰ 2044

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणसिंह27 अग॰ 203622 अक्टू॰ 2038
दूसरा (मध्य) चरणकन्या22 अक्टू॰ 20385 अप्रैल 2039
पहला चरणसिंह5 अप्रैल 203913 जुल॰ 2039
दूसरा (मध्य) चरणकन्या13 जुल॰ 203929 जन॰ 2041
तीसरा (अंतिम) चरणतुला29 जन॰ 20415 फ़र॰ 2041
दूसरा (मध्य) चरणकन्या5 फ़र॰ 204126 सित॰ 2041
तीसरा (अंतिम) चरणतुला26 सित॰ 204112 दिस॰ 2043
तीसरा (अंतिम) चरणतुला23 जून 204430 अग॰ 2044

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (सिंह)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि सिंह में हैं, जो उनके शत्रु सूर्य की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (कन्या)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि कन्या में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (तुला)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि तुला में उच्च के हैं, अपनी सबसे मज़बूत राशि में, और शास्त्रों के अनुसार इससे यह दौर काफ़ी हल्का हो जाता है।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। कन्या राशि के लिए ये धनु और मेष हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
कंटक शनि (चौथा भाव)धनु26 जन॰ 201721 जून 2017
कंटक शनि (चौथा भाव)धनु26 अक्टू॰ 201724 जन॰ 2020
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मेष3 जून 202720 अक्टू॰ 2027
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मेष23 फ़र॰ 20288 अग॰ 2029
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मेष5 अक्टू॰ 202917 अप्रैल 2030
कंटक शनि (चौथा भाव)धनु8 दिस॰ 20466 मार्च 2049
कंटक शनि (चौथा भाव)धनु10 जुल॰ 20494 दिस॰ 2049
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मेष7 अप्रैल 205728 मई 2059

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

कन्या राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

कन्या राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

कन्या राशि की अगली साढ़ेसाती 27 अग॰ 2036 से 30 अग॰ 2044 तक है।

कन्या राशि पर ढैया कब है?

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 3 जून 2027 – 20 अक्टू॰ 2027; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 23 फ़र॰ 2028 – 8 अग॰ 2029; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 5 अक्टू॰ 2029 – 17 अप्रैल 2030।

कन्या राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: सिंह। शनि सिंह में हैं, जो उनके शत्रु सूर्य की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें। दूसरा (मध्य) चरण: कन्या। शनि कन्या में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है। तीसरा (अंतिम) चरण: तुला। शनि तुला में उच्च के हैं, अपनी सबसे मज़बूत राशि में, और शास्त्रों के अनुसार इससे यह दौर काफ़ी हल्का हो जाता है।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।