शनि की साढ़ेसाती · ♈ मेष (Aries)
मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती
मेष चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।
आज · 28 अक्टू॰ 2026
साढ़ेसाती चल रही है: पहला चरण। यह 31 मई 2032 को समाप्त होगी।
साढ़ेसाती की तारीख़ें
मेष राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।
2 जून 1995 – 7 अप्रैल 2003
| चरण | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | मीन | 2 जून 1995 | 10 अग॰ 1995 |
| पहला चरण | मीन | 16 फ़र॰ 1996 | 17 अप्रैल 1998 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मेष | 17 अप्रैल 1998 | 7 जून 2000 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | वृषभ | 7 जून 2000 | 23 जुल॰ 2002 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | वृषभ | 8 जन॰ 2003 | 7 अप्रैल 2003 |
29 मार्च 2025 – 31 मई 2032
| चरण | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | मीन | 29 मार्च 2025 | 3 जून 2027 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मेष | 3 जून 2027 | 20 अक्टू॰ 2027 |
| पहला चरण | मीन | 20 अक्टू॰ 2027 | 23 फ़र॰ 2028 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मेष | 23 फ़र॰ 2028 | 8 अग॰ 2029 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | वृषभ | 8 अग॰ 2029 | 5 अक्टू॰ 2029 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मेष | 5 अक्टू॰ 2029 | 17 अप्रैल 2030 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | वृषभ | 17 अप्रैल 2030 | 31 मई 2032 |
हर चरण का आप पर असर
पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (मीन)
पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।
शनि मीन में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।
दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (मेष)
साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।
शनि मेष में नीच के हैं, अपनी सबसे कमज़ोर राशि में; परंपरा इसे ज़्यादा कठिन दौर मानती है, जहाँ धैर्य और विनम्रता सबसे ज़्यादा काम आते हैं।
तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (वृषभ)
अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।
शनि वृषभ में हैं, जो उनके मित्र शुक्र की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।
शनि की ढैया की तारीख़ें
ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। मेष राशि के लिए ये कर्क और वृश्चिक हैं।
| ढैया | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | वृश्चिक | 2 नव॰ 2014 | 26 जन॰ 2017 |
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | वृश्चिक | 21 जून 2017 | 26 अक्टू॰ 2017 |
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कर्क | 13 जुल॰ 2034 | 27 अग॰ 2036 |
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | वृश्चिक | 12 दिस॰ 2043 | 23 जून 2044 |
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | वृश्चिक | 30 अग॰ 2044 | 8 दिस॰ 2046 |
कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।
अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।
साढ़ेसाती और ढैया में उपाय
- मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
- शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
- ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
- पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।
हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र
तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।
अपनी चंद्र राशि नहीं पता?
साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।
दूसरी राशियों की साढ़ेसाती
सवाल-जवाब
मेष राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल
मेष राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?
मेष राशि की चल रही साढ़ेसाती 29 मार्च 2025 से 31 मई 2032 तक है।
मेष राशि पर ढैया कब है?
कंटक शनि (चौथा भाव): 13 जुल॰ 2034 – 27 अग॰ 2036; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 12 दिस॰ 2043 – 23 जून 2044; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 30 अग॰ 2044 – 8 दिस॰ 2046।
मेष राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?
पहला चरण: मीन। शनि मीन में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल। दूसरा (मध्य) चरण: मेष। शनि मेष में नीच के हैं, अपनी सबसे कमज़ोर राशि में; परंपरा इसे ज़्यादा कठिन दौर मानती है, जहाँ धैर्य और विनम्रता सबसे ज़्यादा काम आते हैं। तीसरा (अंतिम) चरण: वृषभ। शनि वृषभ में हैं, जो उनके मित्र शुक्र की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।
साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?
मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।