व्रत और त्योहार
प्रदोष व्रत कैलेंडर
सभी प्रदोष व्रत नई दिल्ली के लिए: सोम, भौम और शनि प्रदोष, त्रयोदशी का समय और शाम की पूजा का समय।
अगली प्रदोष व्रत
शुक्र प्रदोष
शुक्र, 6 नव॰ 2026
कार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी (अमांत आश्विन)
आरंभ: 6 नव॰, 10:31 · समाप्त: 7 नव॰, 10:48
- पूजा 17:33 – 20:10
आने वाली तिथियाँ
| तारीख़ | प्रदोष | तिथि | पूजा का समय |
|---|---|---|---|
| रवि, 22 नव॰ | रवि प्रदोषकार्तिक, शुक्ल त्रयोदशी | आरंभ: 22 नव॰, 04:57 समाप्त: 23 नव॰, 02:38 | पूजा 17:25 – 20:06 |
| रवि, 6 दिस॰ | रवि प्रदोषमार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी (अमांत कार्तिक) | आरंभ: 6 दिस॰, 00:53 समाप्त: 7 दिस॰, 02:23 | पूजा 17:24 – 20:07 |
| सोम, 21 दिस॰ | सोम प्रदोषमार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी | आरंभ: 21 दिस॰, 17:37 समाप्त: 22 दिस॰, 14:24 | पूजा 17:37 – 20:13 |
प्रदोष व्रत हर पक्ष की त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, यानी महीने में दो बार। पूजा प्रदोष काल में, सूर्यास्त के बाद की संध्या में होती है, जब माना जाता है कि शिव प्रसन्न होकर कैलाश पर नृत्य करते हैं।
व्रत उस दिन होता है जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी अधिक समय तक रहे। दिन के अनुसार इसके नाम हैं: सोमवार को सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष और शनिवार को शनि प्रदोष, जो विशेष फलदायी माने जाते हैं।
समय नई दिल्ली के भारतीय मानक समय (IST) में हैं। सूर्योदय पर आधारित तारीख़ें दूसरे शहरों में एक दिन अलग हो सकती हैं, इसलिए दिल्ली से दूर रहते हों तो स्थानीय पंचांग देखें।
अन्य व्रत कैलेंडर
पूजा में पढ़ें
- शिव चालीसा
भगवान शिव की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर शांति और रक्षा के लिए किया जाता है।
शिव आरती
सवाल-जवाब
प्रदोष व्रत से जुड़े सवाल
प्रदोष व्रत में पूजा कब करें?
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, जब तक त्रयोदशी हो। हर प्रदोष का पूजा समय तालिका में दिया गया है।
सोम प्रदोष और शनि प्रदोष क्या हैं?
सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष सोम प्रदोष और शनिवार वाला शनि प्रदोष कहलाता है। सोम प्रदोष मनोकामना पूरी होने के लिए और शनि प्रदोष संतान और शनि की शांति के लिए विशेष माना जाता है।