मंत्र और चालीसा
शनि चालीसा: अर्थ सहित
सभी चालीस चौपाइयाँ और दोहे, हर पंक्ति के सरल हिंदी अर्थ के साथ।
शनि चालीसा शनिदेव की चालीस चौपाइयों वाली सरल हिंदी स्तुति है। एक चौपाई में कवि राम सुंदर और अंतिम दोहे में विमल का नाम आता है; उनके समय की जानकारी नहीं मिलती, और यह स्तुति शनिवार को और शनि की कठिन दशा में ख़ूब पढ़ी जाती है।
शनि चालीसा अर्थ सहित
- दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन मंगल करण कृपाल।दीनन के दुख दूर करि कीजै नाथ निहाल॥
Jai Ganesh Girija suvan, mangal karan kripalDeenan ke dukh door kari, keejai nath nihal
हे गिरिजा-पुत्र गणेश, मंगल करने वाले कृपालु, आपकी जय हो; हे नाथ, दीनों के दुख दूर करके उन्हें निहाल कीजिए।
- दोहा
जय जय श्री शनिदेव प्रभु सुनहु विनय महाराज।करहु कृपा हे रवि तनय राखहु जनकी लाज॥
Jai jai Shri Shanidev prabhu, sunahu vinay MaharajKarahu kripa he Ravi tanay, rakhahu jan ki laj
हे प्रभु शनिदेव, आपकी जय हो; हे महाराज, मेरी विनती सुनिए। हे सूर्यपुत्र, कृपा कीजिए और भक्त की लाज रखिए।
- चौपाई 1
जयति जयति शनिदेव दयाला।करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
Jayati jayati Shanidev dayalaKarat sada bhaktan pratipala
हे दयालु शनिदेव, आपकी जय हो; आप सदा भक्तों की रक्षा करते हैं।
- चौपाई 2
चारि भुजा तनु श्याम विराजै।माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
Chari bhuja tanu shyam virajaiMathe ratan mukut chhabi chhajai
आपकी चार भुजाएँ और श्याम शरीर है, और माथे पर रत्नों का मुकुट शोभा देता है।
- चौपाई 3
परम विशाल मनोहर भाला।टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
Param vishal manohar bhalaTedhi drishti bhrikuti vikrala
आपका माथा विशाल और मनोहर है; दृष्टि टेढ़ी और भौंहें विकराल हैं।
- चौपाई 4
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।हिये माल मुक्तन मणि दमकै॥
Kundal shravan chamacham chamakeHiye mal muktan mani damakai
कानों में कुंडल चमाचम चमकते हैं, और छाती पर मोतियों और मणियों की माला दमकती है।
- चौपाई 5
कर में गदा त्रिशूल कुठारा।पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
Kar mein gada trishul kutharaPal bich karain arihin sanhara
हाथों में गदा, त्रिशूल और फरसा है, जिनसे आप पल भर में शत्रुओं का संहार करते हैं।
- चौपाई 6
पिंगल कृष्णो छाया नन्दन।यम कोणस्थ रौद्र दुख भंजन॥
Pingal Krishno Chhaya nandanYam Konasth Raudra dukh bhanjan
पिंगल, कृष्ण, छाया-पुत्र, यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख का नाश करने वाले,
- चौपाई 7
सौरी मन्द शनी दश नामा।भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
Sauri Mand Shani dash namaBhanu putra poojahin sab kama
सौरि, मंद, शनि, ये आपके दस नाम हैं। सूर्यपुत्र की पूजा से सब काम सिद्ध होते हैं।
- चौपाई 8
जापर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
Japar prabhu prasann hvain jahinRankahun Rav karain kshan mahin
जिस पर प्रभु प्रसन्न हो जाते हैं, उस रंक को भी क्षण भर में राजा बना देते हैं।
- चौपाई 9
पर्वतहू तृण होइ निहारत।तृणहू को पर्वत करि डारत॥
Parvatahu trin hoi niharatTrinahu ko parvat kari darat
आपकी दृष्टि से पर्वत भी तिनका हो जाता है, और तिनका भी पर्वत बन जाता है।
- चौपाई 10
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
Raj milat ban Ramahin deenhyoKaikeihun ki mati hari leenhyo
राज मिलते समय आपने राम को वन दे दिया, और कैकेयी की बुद्धि हर ली।
- चौपाई 11
बनहूँ में मृग कपट दिखाई।मातु जानकी गई चुराई॥
Banahun mein mrig kapat dikhaiMatu Janaki gai churai
वन में कपट-मृग दिखाया, और माता जानकी चुरा ली गईं।
- चौपाई 12
लषणहिं शक्ति विकल करिडारा।मचिगा दल में हाहाकारा॥
Lashanahin shakti vikal karidaraMachiga dal mein hahakara
शक्ति-बाण से लक्ष्मण व्याकुल हो गए, और सेना में हाहाकार मच गया।
- चौपाई 13
रावण की गति-मति बौराई।रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
Ravan ki gati mati bauraiRamchandra son bair badhai
रावण की गति और बुद्धि बौरा गई, और उसने रामचंद्र से बैर बढ़ाया।
- चौपाई 14
दियो कीट करि कंचन लंका।बजि बजरंग बीर की डंका॥
Diyo keet kari kanchan LankaBaji Bajrang beer ki danka
आपने सोने की लंका को मिट्टी कर दिया, और वीर बजरंग का डंका बज गया।
- चौपाई 15
नृप विक्रम पर तुहिं पगु धारा।चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
Nrip Vikram par tuhin pagu dharaChitra mayur nigali gai hara
जब आपने राजा विक्रम पर पाँव रखा, तो चित्र का मोर हार निगल गया,
- चौपाई 16
हार नौंलखा लाग्यो चोरी।हाथ पैर डरवायो तोरी॥
Har naulakha lagyo choriHath pair darvayo tori
उन पर नौलखा हार की चोरी लगी, और उनके हाथ-पैर तुड़वा दिए गए।
- चौपाई 17
भारी दशा निकृष्ट दिखायो।तेलहिं घर कोल्हू चलवायो॥
Bhari dasha nikrisht dikhayoTelahin ghar kolhu chalvayo
आपने उन्हें बहुत बुरी दशा दिखाई और तेली के घर कोल्हू चलवाया।
- चौपाई 18
विनय राग दीपक महँ कीन्हयों।तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
Vinay rag Deepak mahan keenhyonTab prasann prabhu hvai sukh deenhyon
जब उन्होंने राग दीपक में विनती की, तब प्रभु, आपने प्रसन्न होकर सुख दिया।
- चौपाई 19
हरिश्चंद्र नृप नारि बिकानी।आपहुं भरें डोम घर पानी॥
Harishchandra nrip nari bikaniAapahun bharein Dom ghar pani
राजा हरिश्चंद्र की पत्नी बिक गई, और वे स्वयं डोम के घर पानी भरने लगे।
- चौपाई 20
तैसे नल पर दशा सिरानी।भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
Taise Nal par dasha siraniBhunji meen kood gai pani
वैसे ही नल पर बुरी दशा आई, यहाँ तक कि भुनी हुई मछली भी पानी में कूद गई।
- चौपाई 21
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।पारवती को सती कराई॥
Shri Shankarahin gahyo jab jaiParvati ko Sati karai
जब आपने शंकर जी को पकड़ा, तो पार्वती (सती रूप में) को सती होना पड़ा।
- चौपाई 22
तनिक विलोकत ही करि रीसा।नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
Tanik vilokat hi kari reesaNabh udi gayo Gaurisut seesa
ज़रा-सा क्रोध से देखते ही गौरी-पुत्र का सिर आकाश में उड़ गया।
- चौपाई 23
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।बची द्रौपदी होति उघारी॥
Pandav par bhai dasha tumhariBachi Draupadi hoti ughari
पांडवों पर आपकी दशा आई, और द्रौपदी निर्वस्त्र होते-होते बचीं।
- चौपाई 24
कौरव के भी गति मति मारयो।युद्ध महाभारत करि डारयो॥
Kaurav ke bhi gati mati maryoYuddh Mahabharat kari daryo
आपने कौरवों की भी गति-मति मार दी और महाभारत का युद्ध करा दिया।
- चौपाई 25
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।लेकर कूदि परयो पाताला॥
Ravi kahan mukh mahan dhari tatkalaLekar koodi paryo patala
आपने तुरंत सूर्य को मुख में दबाया और उन्हें लेकर पाताल में कूद गए।
- चौपाई 26
शेष देव-लखि विनति लाई।रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
Shesh dev lakhi vinati laiRavi ko mukh te diyo chhudai
यह देखकर देवताओं ने विनती की, और आपने सूर्य को मुख से छोड़ दिया।
- चौपाई 27
वाहन प्रभु के सात सुजाना।जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
Vahan prabhu ke sat sujanaJag diggaj gardabh mrig svana
प्रभु के सात वाहन हैं: हाथी, घोड़ा, गधा, हिरण, कुत्ता,
- चौपाई 28
जम्बुक सिंह आदि नख धारी।सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
Jambuk sinh aadi nakh dhariSo phal jyotish kahat pukari
सियार और नाख़ूनों वाला सिंह; ज्योतिष इनका फल पुकारकर बताता है।
- चौपाई 29
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं॥
Gaj vahan Lakshmi grih avainHay te sukh sampatti upjavain
हाथी पर आने से घर में लक्ष्मी आती हैं; घोड़े पर आने से सुख-संपत्ति बढ़ती है।
- चौपाई 30
गर्दभ हानि करै बहु काजा।सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
Gardabh hani karai bahu kajaSinh siddhkar raj samaja
गधे पर आने से कई कामों में हानि होती है; सिंह पर आने से राज-समाज में सफलता मिलती है।
- चौपाई 31
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
Jambuk buddhi nasht kar daraiMrig de kasht pran sanharai
सियार पर आने से बुद्धि नष्ट होती है; हिरण पर आने से कष्ट और प्राणों का संकट होता है।
- चौपाई 32
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।चोरी आदि होय डर भारी॥
Jab avahin prabhu svan savariChori aadi hoy dar bhari
जब प्रभु कुत्ते की सवारी पर आते हैं, तो चोरी आदि का बड़ा डर होता है।
- चौपाई 33
तैसहि चारी चरण यह नामा।स्वर्ण लौह चाँदि अरु तामा॥
Taisahi chari charan yah namaSwarn lauh chandi aru tama
इसी तरह उनके चार चरण हैं: सोना, लोहा, चाँदी और ताँबा।
- चौपाई 34
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
Lauh charan par jab prabhu avainDhan jan sampatti nasht karavain
जब प्रभु लोहे के चरण पर आते हैं, तो धन, जन और संपत्ति का नाश करवाते हैं।
- चौपाई 35
समता ताम्र रजत शुभकारी।स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी॥
Samata tamra rajat shubhkariSwarn sarv sukh mangal bhari
ताँबा समता और चाँदी शुभ फल देती है; सोना सब सुख और भारी मंगल देता है।
- चौपाई 36
जो यह शनि चरित्र नित गावै।कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
Jo yah Shani charitra nit gavaiKabahun na dasha nikrisht satavai
जो रोज़ यह शनि चरित्र गाता है, उसे कभी बुरी दशा नहीं सताती।
- चौपाई 37
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
Adbhut nath dikhavain leelaKarain shatru ke nashi bali dheela
प्रभु अद्भुत लीलाएँ दिखाते हैं और शत्रुओं का बल ढीला कर देते हैं।
- चौपाई 38
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
Jo pandit suyogya bulvaiVidhivat Shani grah shanti karai
जो योग्य पंडित को बुलाकर विधिपूर्वक शनि ग्रह की शांति कराता है,
- चौपाई 39
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।दीप दान दै बहु सुख पावत॥
Peepal jal Shani divas chadhavatDeep dan dai bahu sukh pavat
और शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाकर दीपदान करता है, वह बहुत सुख पाता है।
- चौपाई 40
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥
Kahat Ram Sundar prabhudasaShani sumirat sukh hot prakasha
प्रभु के दास राम सुंदर कहते हैं: शनि का स्मरण करने से सुख का प्रकाश होता है।
- अंतिम दोहा
पाठ शनिश्चर देव को कीन्हों विमल तैयार।करत पाठ चालीस दिन हो भवसागर पार॥
Path Shanishchar dev ko, keenhon Vimal taiyarKarat path chalis din, ho bhavsagar par
शनिदेव का यह पाठ विमल ने तैयार किया है। चालीस दिन पाठ करने से भवसागर पार हो जाता है।
शनि आरती: जय जय श्री शनिदेव
रचना: परंपरागत
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
Jai jai Shri Shanidev bhaktan hitkariSuraj ke putra prabhu Chhaya mahtari
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
Shyam ank vakra drisht chaturbhuja dhariNeelambar dhar nath gaj ki asvari
किरीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
Kireet mukut sheesh rajit dipat hai lilariMuktan ki mala gale shobhit balihari
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
Modak mishthan pan chadhat hain supariLoha til tel udad mahishi ati pyari
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
Dev danuj rishi muni sumirat nar nariVishvanath dharat dhyan sharan hain tumhari
भक्तों के हितकारी शनिदेव की जय हो, जो सूर्य के पुत्र और छाया माता के लाल हैं: श्याम वर्ण, चार भुजाएँ, टेढ़ी दृष्टि, नीले वस्त्र और हाथी की सवारी, सिर पर मुकुट और गले में मोतियों की माला। उन्हें मोदक, मिठाई, पान और सुपारी चढ़ते हैं, और लोहा, तिल, तेल और उड़द अति प्रिय हैं। देवता, दानव, ऋषि, मुनि और नर-नारी उनका स्मरण करते हैं, शिव भी उनका ध्यान करते हैं: हम आपकी शरण में हैं।
शनि चालीसा के बारे में
इसमें शनि के रूप का वर्णन है, श्याम वर्ण, चार भुजाएँ, गदा, त्रिशूल और फरसा, और उनके दस नाम, जैसे कोणस्थ, पिंगल, कृष्ण, सौरि और मंद। फिर बताया गया है कि उनकी दृष्टि ने राम के वनवास, रावण के पतन, राजा विक्रम, हरिश्चंद्र, नल, पांडवों और गणेश जी के सिर तक को कैसे प्रभावित किया, और कैसे वे राजा को रंक और रंक को राजा बना देते हैं।
आगे के पदों में उनके सात वाहनों और चार चरणों (धातुओं) का ज्योतिषीय फल है, लक्ष्मी लाने वाले हाथी से लेकर चोरी का डर दिखाने वाले कुत्ते तक, और कहा गया है कि नियम से पाठ करने वाले को शनि की बुरी दशा कभी नहीं सताती।
शनि चालीसा की पारंपरिक पाठ विधि
- शनिवार को, हो सके तो शाम को, पश्चिम की ओर मुख करके तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाकर पाठ करें।
- 39वीं चौपाई में शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाने और दीपदान करने का उल्लेख है।
- साढ़ेसाती और ढैय्या में, और शनि अमावस्या व शनि जयंती पर इसका विशेष पाठ होता है; अंतिम दोहे में चालीस दिन पाठ करने को कहा गया है।
- काले तिल, उड़द, सरसों का तेल और लोहा शनि के लिए पारंपरिक दान हैं।
शनि चालीसा और ग्रह
ज्योतिष में शनि चालीसा का पाठ आमतौर पर शनि के लिए किया जाता है। इसके साथ इन ग्रहों के बीज मंत्र भी जप सकते हैं:
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मंत्र और चालीसा आस्था और परंपरा का विषय हैं, और अलग-अलग परिवारों व गुरुओं की विधि में अंतर होता है। यहाँ दी गई जानकारी चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है।
सवाल-जवाब
शनि चालीसा: सवाल-जवाब
शनि चालीसा किसने लिखी?
40वीं चौपाई में कवि राम सुंदर और अंतिम दोहे में विमल का नाम आता है। उनके समय का उल्लेख नहीं मिलता, इसलिए इसे परंपरागत स्तुति माना जाता है।
शनि चालीसा का पाठ कब करें?
शनिवार को, ख़ासकर शाम को, और साढ़ेसाती या ढैय्या में रोज़। अंतिम दोहे में चालीस दिन पाठ करने को कहा गया है।
क्या साढ़ेसाती में शनि चालीसा से लाभ होता है?
परंपरा में हनुमान चालीसा और दशरथकृत शनि स्तोत्र के साथ यह साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रमुख उपाय है। 36वीं चौपाई कहती है कि इसका पाठ करने वाले को शनि की बुरी दशा नहीं सताती।
नवग्रह बीज मंत्र
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उपयोगी कैलकुलेटर
मूलांक और भाग्यांक कैलकुलेटर
जन्मतिथि से अपना मूलांक और भाग्यांक जानें, और देखें कि दोनों का आपस में कैसा संबंध है।
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जन्मतिथि के अंक 3×3 ग्रिड पर: कौन से अंक हैं, कौन से दोहराए गए और कौन से गायब।
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देखें कि आपके नाम का अंक आपके मूलांक और भाग्यांक के अनुकूल है या नहीं।
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