आरती

आरती संग्रह अर्थ सहित

उत्तर भारत की सबसे प्रिय आरतियाँ, ॐ जय जगदीश हरे से लेकर शिव, दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी और शनि आरती तक, अंग्रेज़ी लिपि और सरल अर्थ के साथ।

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आरती वह गीत है जो पूजा के अंत में देवता के सामने दीपक घुमाते हुए गाया जाता है। यह शब्द संस्कृत के 'आरात्रिक' से बना है, यानी अंधकार दूर करने वाला दीपक। हर देवता की अपनी आरती है, और बहुत से परिवार हर पूजा के अंत में ॐ जय जगदीश हरे गाते हैं।

हर पेज पर पूरी आरती देवनागरी और अंग्रेज़ी लिपि में है, साथ में उसका अर्थ, कब गाई जाती है, और किस चालीसा के साथ गाई जाती है। साथ-साथ पढ़ने के लिए अक्षर का आकार और सुनें बटन इस्तेमाल करें।

आरती कैसे करें

  1. थाली में घी (या कपूर) का दीपक जलाएँ, साथ में फूल, थोड़े अक्षत और धूप रखें।
  2. घंटी बजाते हुए गाते समय थाली को देवता के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ: परंपरा में चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरी प्रतिमा पर सात बार।
  3. आरती के बाद दीपक की लौ पर हाथ फेरकर आँखों और माथे से लगाएँ, और प्रसाद बाँटें।