आरती
आरती संग्रह अर्थ सहित
उत्तर भारत की सबसे प्रिय आरतियाँ, ॐ जय जगदीश हरे से लेकर शिव, दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी और शनि आरती तक, अंग्रेज़ी लिपि और सरल अर्थ के साथ।
- ॐ जय जगदीश हरेॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।रचना: पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी (1837–1881)
- शिव आरतीजय शिव ओंकारा हर जय शिव ओंकारा।रचना: परंपरागत (शिवानंद स्वामी का नाम)
- दुर्गा आरतीजय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।रचना: परंपरागत (शिवानंद स्वामी का नाम)
- गणेश आरतीजय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।रचना: परंपरागत
- लक्ष्मी आरतीॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।रचना: परंपरागत
- शनि आरतीजय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।रचना: परंपरागत
- हनुमान स्तुतिमंगल मूरति मारुत नंदन।रचना: गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका)
- श्री रामचन्द्र कृपालुश्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं।रचना: गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका)
आरती वह गीत है जो पूजा के अंत में देवता के सामने दीपक घुमाते हुए गाया जाता है। यह शब्द संस्कृत के 'आरात्रिक' से बना है, यानी अंधकार दूर करने वाला दीपक। हर देवता की अपनी आरती है, और बहुत से परिवार हर पूजा के अंत में ॐ जय जगदीश हरे गाते हैं।
हर पेज पर पूरी आरती देवनागरी और अंग्रेज़ी लिपि में है, साथ में उसका अर्थ, कब गाई जाती है, और किस चालीसा के साथ गाई जाती है। साथ-साथ पढ़ने के लिए अक्षर का आकार और सुनें बटन इस्तेमाल करें।
आरती कैसे करें
- थाली में घी (या कपूर) का दीपक जलाएँ, साथ में फूल, थोड़े अक्षत और धूप रखें।
- घंटी बजाते हुए गाते समय थाली को देवता के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ: परंपरा में चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरी प्रतिमा पर सात बार।
- आरती के बाद दीपक की लौ पर हाथ फेरकर आँखों और माथे से लगाएँ, और प्रसाद बाँटें।