वैदिक ज्योतिष · दैनिक पंचांग
आज का पंचांग: आपके शहर के लिए
किसी भी दिन और किसी भी शहर का हिंदू पंचांग: दिन के पाँच अंग, सूर्योदय और चंद्रोदय, और शुभ-अशुभ समय, सब स्थानीय समय में। यह आपके अपने शहर और आज की तारीख़ से खुलता है।
समय आपके चुने हुए शहर के स्थानीय समय में दिखाए जाते हैं। शहर का नाम अंग्रेज़ी में लिखें।
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दिन के पाँच अंग
तिथि चंद्र दिवस है: हर बार जब चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है, नई तिथि शुरू होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर समाप्त) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर समाप्त)। नक्षत्र वह तारा समूह है जिससे चंद्रमा गुज़र रहा है, 27 में से एक। योग सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनता है, और करण आधी तिथि है। वार सप्ताह का दिन है, जो हिंदू पंचांग में आधी रात से नहीं, सूर्योदय से शुरू होता है।
शुभ समय कैसे चुनें
स्थानीय दोपहर के आसपास का अभिजीत मुहूर्त ज़्यादातर कामों के लिए शुभ माना जाता है, जबकि राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल में नए काम की शुरुआत टाली जाती है। करण में विष्टि, जिसे भद्रा भी कहते हैं, शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानी जाती है। कई परिवार तिथि और नक्षत्र देखकर भी दिन चुनते हैं; अपनी कुंडली के लिए जन्म कुंडली देखें या जानें आज का अंक।
सवाल-जवाब
पंचांग से जुड़े सवाल
पंचांग क्या है?
पंचांग, यानी 'पाँच अंग', किसी दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय और दिन के शुभ-अशुभ समय के साथ मिलकर इसका उपयोग संस्कार, यात्रा और नए काम की शुरुआत का समय चुनने में होता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
पंचांग स्थानीय सूर्योदय पर पढ़ा जाता है, और सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल जैसे समय इस पर निर्भर करते हैं कि आप कहाँ हैं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण बदलते हैं, पर उस क्षण का स्थानीय घड़ी समय अलग होता है।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। हर वार के लिए राहु काल एक तय भाग होता है: सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा, शनिवार को तीसरा और रविवार को आठवाँ। दिन की लंबाई साल भर बदलती है, इसलिए राहु काल भी बदलता है।
यह पंचांग कितना सटीक है?
ग्रहों की स्थिति लाहिड़ी अयनांश से निकाली जाती है और प्रतिष्ठित पंचांग सॉफ़्टवेयर से जाँची गई है; तिथि, नक्षत्र, योग और करण के समाप्ति समय लगभग एक मिनट के भीतर मिलते हैं। चंद्रोदय और चंद्रास्त में अलग-अलग पंचांगों के बीच कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, क्योंकि चंद्रमा के किनारे को मापने की परिपाटी अलग होती है।
अमांत और पूर्णिमांत मास में क्या अंतर है?
अमांत पद्धति में महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रचलित है। पूर्णिमांत पद्धति में महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है, जो उत्तर भारत में प्रचलित है। शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक होता है; कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत महीना अगले मास के नाम से जाना जाता है। यह पंचांग दोनों दिखाता है।