शनि की साढ़ेसाती · ♊ मिथुन (Gemini)
मिथुन राशि पर शनि की साढ़ेसाती
मिथुन चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।
आज · 28 अक्टू॰ 2026
अभी साढ़ेसाती या ढैया नहीं है। अगली साढ़ेसाती 8 अग॰ 2029 से शुरू होगी।
साढ़ेसाती की तारीख़ें
मिथुन राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।
7 जून 2000 – 16 जुल॰ 2007
| चरण | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | वृषभ | 7 जून 2000 | 23 जुल॰ 2002 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मिथुन | 23 जुल॰ 2002 | 8 जन॰ 2003 |
| पहला चरण | वृषभ | 8 जन॰ 2003 | 7 अप्रैल 2003 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मिथुन | 7 अप्रैल 2003 | 6 सित॰ 2004 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | कर्क | 6 सित॰ 2004 | 13 जन॰ 2005 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मिथुन | 13 जन॰ 2005 | 26 मई 2005 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | कर्क | 26 मई 2005 | 1 नव॰ 2006 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | कर्क | 10 जन॰ 2007 | 16 जुल॰ 2007 |
8 अग॰ 2029 – 27 अग॰ 2036
| चरण | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | वृषभ | 8 अग॰ 2029 | 5 अक्टू॰ 2029 |
| पहला चरण | वृषभ | 17 अप्रैल 2030 | 31 मई 2032 |
| दूसरा (मध्य) चरण | मिथुन | 31 मई 2032 | 13 जुल॰ 2034 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | कर्क | 13 जुल॰ 2034 | 27 अग॰ 2036 |
हर चरण का आप पर असर
पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (वृषभ)
पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।
शनि वृषभ में हैं, जो उनके मित्र शुक्र की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।
दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (मिथुन)
साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।
शनि मिथुन में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।
तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (कर्क)
अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।
शनि कर्क में हैं, जो उनके शत्रु चंद्र की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।
शनि की ढैया की तारीख़ें
ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। मिथुन राशि के लिए ये कन्या और मकर हैं।
| ढैया | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | मकर | 24 जन॰ 2020 | 29 अप्रैल 2022 |
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | मकर | 12 जुल॰ 2022 | 17 जन॰ 2023 |
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कन्या | 22 अक्टू॰ 2038 | 5 अप्रैल 2039 |
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कन्या | 13 जुल॰ 2039 | 29 जन॰ 2041 |
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कन्या | 5 फ़र॰ 2041 | 26 सित॰ 2041 |
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | मकर | 6 मार्च 2049 | 10 जुल॰ 2049 |
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | मकर | 4 दिस॰ 2049 | 25 फ़र॰ 2052 |
कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।
अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।
साढ़ेसाती और ढैया में उपाय
- मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
- शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
- ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
- पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।
हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र
तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।
अपनी चंद्र राशि नहीं पता?
साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।
दूसरी राशियों की साढ़ेसाती
सवाल-जवाब
मिथुन राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल
मिथुन राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?
मिथुन राशि की अगली साढ़ेसाती 8 अग॰ 2029 से 27 अग॰ 2036 तक है।
मिथुन राशि पर ढैया कब है?
कंटक शनि (चौथा भाव): 22 अक्टू॰ 2038 – 5 अप्रैल 2039; कंटक शनि (चौथा भाव): 13 जुल॰ 2039 – 29 जन॰ 2041; कंटक शनि (चौथा भाव): 5 फ़र॰ 2041 – 26 सित॰ 2041।
मिथुन राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?
पहला चरण: वृषभ। शनि वृषभ में हैं, जो उनके मित्र शुक्र की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है। दूसरा (मध्य) चरण: मिथुन। शनि मिथुन में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है। तीसरा (अंतिम) चरण: कर्क। शनि कर्क में हैं, जो उनके शत्रु चंद्र की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।
साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?
मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।