शनि की साढ़ेसाती · ♉ वृषभ (Taurus)

वृषभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती

वृषभ चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

Read in English

आज · 28 अक्टू॰ 2026

अभी साढ़ेसाती या ढैया नहीं है। अगली साढ़ेसाती 3 जून 2027 से शुरू होगी।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

वृषभ राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

17 अप्रैल 1998 – 26 मई 2005

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणमेष17 अप्रैल 19987 जून 2000
दूसरा (मध्य) चरणवृषभ7 जून 200023 जुल॰ 2002
तीसरा (अंतिम) चरणमिथुन23 जुल॰ 20028 जन॰ 2003
दूसरा (मध्य) चरणवृषभ8 जन॰ 20037 अप्रैल 2003
तीसरा (अंतिम) चरणमिथुन7 अप्रैल 20036 सित॰ 2004
तीसरा (अंतिम) चरणमिथुन13 जन॰ 200526 मई 2005

3 जून 2027 – 13 जुल॰ 2034

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणमेष3 जून 202720 अक्टू॰ 2027
पहला चरणमेष23 फ़र॰ 20288 अग॰ 2029
दूसरा (मध्य) चरणवृषभ8 अग॰ 20295 अक्टू॰ 2029
पहला चरणमेष5 अक्टू॰ 202917 अप्रैल 2030
दूसरा (मध्य) चरणवृषभ17 अप्रैल 203031 मई 2032
तीसरा (अंतिम) चरणमिथुन31 मई 203213 जुल॰ 2034

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (मेष)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि मेष में नीच के हैं, अपनी सबसे कमज़ोर राशि में; परंपरा इसे ज़्यादा कठिन दौर मानती है, जहाँ धैर्य और विनम्रता सबसे ज़्यादा काम आते हैं।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (वृषभ)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि वृषभ में हैं, जो उनके मित्र शुक्र की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (मिथुन)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि मिथुन में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। वृषभ राशि के लिए ये सिंह और धनु हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)धनु26 जन॰ 201721 जून 2017
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)धनु26 अक्टू॰ 201724 जन॰ 2020
कंटक शनि (चौथा भाव)सिंह27 अग॰ 203622 अक्टू॰ 2038
कंटक शनि (चौथा भाव)सिंह5 अप्रैल 203913 जुल॰ 2039
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)धनु8 दिस॰ 20466 मार्च 2049
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)धनु10 जुल॰ 20494 दिस॰ 2049

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

मेरी चंद्र राशि जानें

दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

वृषभ राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

वृषभ राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

वृषभ राशि की अगली साढ़ेसाती 3 जून 2027 से 13 जुल॰ 2034 तक है।

वृषभ राशि पर ढैया कब है?

कंटक शनि (चौथा भाव): 27 अग॰ 2036 – 22 अक्टू॰ 2038; कंटक शनि (चौथा भाव): 5 अप्रैल 2039 – 13 जुल॰ 2039; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 8 दिस॰ 2046 – 6 मार्च 2049।

वृषभ राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: मेष। शनि मेष में नीच के हैं, अपनी सबसे कमज़ोर राशि में; परंपरा इसे ज़्यादा कठिन दौर मानती है, जहाँ धैर्य और विनम्रता सबसे ज़्यादा काम आते हैं। दूसरा (मध्य) चरण: वृषभ। शनि वृषभ में हैं, जो उनके मित्र शुक्र की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है। तीसरा (अंतिम) चरण: मिथुन। शनि मिथुन में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।