आरती

ॐ जय जगदीश हरे अर्थ सहित

पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी रचित संपूर्ण ॐ जय जगदीश हरे आरती, अंग्रेज़ी लिपि और सरल अर्थ के साथ। ऑनलाइन पढ़ें या सुनें।

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ॐ जय जगदीश हरे उत्तर भारत की सबसे प्रसिद्ध आरती है, जो जगत के स्वामी भगवान विष्णु की स्तुति है और लगभग हर पूजा और त्योहार के अंत में गाई जाती है, चाहे पूजा किसी भी देवता की हो। इसकी रचना 1870 के दशक में पंजाब के फिल्लौर के विद्वान और लेखक पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी (1837–1881) ने की थी।

ॐ जय जगदीश हरे: आरती के बोल

रचना: पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी (1837–1881)

  1. ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

    Om jai Jagdish Hare, Swami jai Jagdish HareBhakt janon ke sankat, das janon ke sankat, kshan mein door kare

  2. जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

    Jo dhyave phal pave, dukh binse man kaSukh sampati ghar aave, kasht mite tan ka

  3. मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥

    Mat pita tum mere, sharan gahun main kiskiTum bin aur na duja, aas karun main jiski

  4. तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी।पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

    Tum puran Parmatma, tum antaryamiParbrahm Parmeshvar, tum sab ke swami

  5. तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

    Tum karuna ke sagar, tum palankartaMain moorakh khal kami, kripa karo bharta

  6. तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

    Tum ho ek agochar, sabke pranpatiKis vidhi milun dayamay, tumko main kumati

  7. दीनबंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे।अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

    Deenbandhu dukhharta, Thakur tum mereApne hath uthao, apne sharan lagao, dvar pada tere

  8. विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥

    Vishay vikar mitao, pap haro devaShraddha bhakti badhao, santan ki seva

भगवान विष्णु की सबसे प्रसिद्ध आरती, जो लगभग हर पूजा के अंत में गाई जाती है, कृष्ण पूजा में भी। जगदीश की जय हो, जो भक्तों के संकट क्षण में दूर करते हैं: जो उनका ध्यान करता है उसे फल मिलता है, मन और तन के दुख मिटते हैं और घर में सुख आता है। आप ही मेरे माता-पिता, पूर्ण परमात्मा, अंतर्यामी और करुणा के सागर हैं; इस मूर्ख को अपनी शरण में लीजिए, विषय-विकार और पाप मिटाइए, और श्रद्धा, भक्ति और संतों की सेवा बढ़ाइए।

इस आरती के बारे में

इसके आठ पदों में भक्त प्रभु को माता-पिता, पूर्ण परमात्मा और करुणा का सागर कहकर संकट, विषय-विकार और पाप मिटाने, और श्रद्धा, भक्ति व संतों की सेवा बढ़ाने की प्रार्थना करता है। इसे देवता के सामने आरती का दीपक घुमाते हुए गाया जाता है।

आरती कैसे करें

  1. थाली में घी (या कपूर) का दीपक जलाएँ, साथ में फूल, थोड़े अक्षत और धूप रखें।
  2. घंटी बजाते हुए गाते समय थाली को देवता के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ: परंपरा में चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरी प्रतिमा पर सात बार।
  3. आरती के बाद दीपक की लौ पर हाथ फेरकर आँखों और माथे से लगाएँ, और प्रसाद बाँटें।

श्री कृष्ण चालीसा पढ़ें

यह आरती आमतौर पर चालीसा के ठीक बाद गाई जाती है; हर चौपाई के अर्थ के साथ चालीसा पढ़ें।

कृष्ण चालीसा

और आरतियाँ

सवाल-जवाब

ॐ जय जगदीश हरे से जुड़े सवाल

ॐ जय जगदीश हरे किसने लिखी?

पंजाब के फिल्लौर के पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी (1837–1881) ने, 1870 के दशक में। वे हिंदी गद्य के अग्रणी लेखकों में भी थे; यह आरती मंदिरों, घरों और बाद में फ़िल्मों के ज़रिए पूरे देश में प्रसिद्ध हुई।

ॐ जय जगदीश हरे किस भगवान की आरती है?

जगत के स्वामी (जगदीश) भगवान विष्णु की। परमेश्वर की प्रार्थना होने के कारण यह ज़्यादातर पूजाओं के अंत में गाई जाती है, जैसे कृष्ण, लक्ष्मी, सत्यनारायण पूजा और एकादशी पर।

ॐ जय जगदीश हरे कब गाई जाती है?

पूजा के अंत में, देवता के सामने आरती का दीपक घुमाते हुए, आमतौर पर सुबह और शाम। बहुत से घरों में रोज़ संध्या के समय गाई जाती है।