शनि की साढ़ेसाती · ♌ सिंह (Leo)

सिंह राशि पर शनि की साढ़ेसाती

सिंह चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

साढ़ेसाती नहीं है, पर शनि की ढैया चल रही है: अष्टम शनि (आठवाँ भाव), 3 जून 2027 तक।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

सिंह राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

6 सित॰ 2004 – 4 अग॰ 2012

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणकर्क6 सित॰ 200413 जन॰ 2005
पहला चरणकर्क26 मई 20051 नव॰ 2006
दूसरा (मध्य) चरणसिंह1 नव॰ 200610 जन॰ 2007
पहला चरणकर्क10 जन॰ 200716 जुल॰ 2007
दूसरा (मध्य) चरणसिंह16 जुल॰ 200710 सित॰ 2009
तीसरा (अंतिम) चरणकन्या10 सित॰ 200915 नव॰ 2011
तीसरा (अंतिम) चरणकन्या16 मई 20124 अग॰ 2012

13 जुल॰ 2034 – 26 सित॰ 2041

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणकर्क13 जुल॰ 203427 अग॰ 2036
दूसरा (मध्य) चरणसिंह27 अग॰ 203622 अक्टू॰ 2038
तीसरा (अंतिम) चरणकन्या22 अक्टू॰ 20385 अप्रैल 2039
दूसरा (मध्य) चरणसिंह5 अप्रैल 203913 जुल॰ 2039
तीसरा (अंतिम) चरणकन्या13 जुल॰ 203929 जन॰ 2041
तीसरा (अंतिम) चरणकन्या5 फ़र॰ 204126 सित॰ 2041

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (कर्क)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि कर्क में हैं, जो उनके शत्रु चंद्र की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (सिंह)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि सिंह में हैं, जो उनके शत्रु सूर्य की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (कन्या)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि कन्या में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। सिंह राशि के लिए ये वृश्चिक और मीन हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
कंटक शनि (चौथा भाव)वृश्चिक2 नव॰ 201426 जन॰ 2017
कंटक शनि (चौथा भाव)वृश्चिक21 जून 201726 अक्टू॰ 2017
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मीन29 मार्च 20253 जून 2027
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मीन20 अक्टू॰ 202723 फ़र॰ 2028
कंटक शनि (चौथा भाव)वृश्चिक12 दिस॰ 204323 जून 2044
कंटक शनि (चौथा भाव)वृश्चिक30 अग॰ 20448 दिस॰ 2046
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मीन14 मई 20542 सित॰ 2054
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)मीन5 फ़र॰ 20557 अप्रैल 2057

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

सिंह राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

सिंह राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

सिंह राशि की अगली साढ़ेसाती 13 जुल॰ 2034 से 26 सित॰ 2041 तक है।

सिंह राशि पर ढैया कब है?

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 29 मार्च 2025 – 3 जून 2027; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 20 अक्टू॰ 2027 – 23 फ़र॰ 2028; कंटक शनि (चौथा भाव): 12 दिस॰ 2043 – 23 जून 2044।

सिंह राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: कर्क। शनि कर्क में हैं, जो उनके शत्रु चंद्र की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें। दूसरा (मध्य) चरण: सिंह। शनि सिंह में हैं, जो उनके शत्रु सूर्य की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें। तीसरा (अंतिम) चरण: कन्या। शनि कन्या में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।