शनि की साढ़ेसाती · ♏ वृश्चिक (Scorpio)
वृश्चिक राशि पर शनि की साढ़ेसाती
वृश्चिक चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।
आज · 28 अक्टू॰ 2026
अभी साढ़ेसाती या ढैया नहीं है। अगली साढ़ेसाती 29 जन॰ 2041 से शुरू होगी।
साढ़ेसाती की तारीख़ें
वृश्चिक राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।
15 नव॰ 2011 – 24 जन॰ 2020
| चरण | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | तुला | 15 नव॰ 2011 | 16 मई 2012 |
| पहला चरण | तुला | 4 अग॰ 2012 | 2 नव॰ 2014 |
| दूसरा (मध्य) चरण | वृश्चिक | 2 नव॰ 2014 | 26 जन॰ 2017 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | धनु | 26 जन॰ 2017 | 21 जून 2017 |
| दूसरा (मध्य) चरण | वृश्चिक | 21 जून 2017 | 26 अक्टू॰ 2017 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | धनु | 26 अक्टू॰ 2017 | 24 जन॰ 2020 |
29 जन॰ 2041 – 4 दिस॰ 2049
| चरण | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | तुला | 29 जन॰ 2041 | 5 फ़र॰ 2041 |
| पहला चरण | तुला | 26 सित॰ 2041 | 12 दिस॰ 2043 |
| दूसरा (मध्य) चरण | वृश्चिक | 12 दिस॰ 2043 | 23 जून 2044 |
| पहला चरण | तुला | 23 जून 2044 | 30 अग॰ 2044 |
| दूसरा (मध्य) चरण | वृश्चिक | 30 अग॰ 2044 | 8 दिस॰ 2046 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | धनु | 8 दिस॰ 2046 | 6 मार्च 2049 |
| तीसरा (अंतिम) चरण | धनु | 10 जुल॰ 2049 | 4 दिस॰ 2049 |
हर चरण का आप पर असर
पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (तुला)
पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।
शनि तुला में उच्च के हैं, अपनी सबसे मज़बूत राशि में, और शास्त्रों के अनुसार इससे यह दौर काफ़ी हल्का हो जाता है।
दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (वृश्चिक)
साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।
शनि वृश्चिक में हैं, जो उनके शत्रु मंगल की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।
तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (धनु)
अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।
शनि धनु में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।
शनि की ढैया की तारीख़ें
ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। वृश्चिक राशि के लिए ये कुंभ और मिथुन हैं।
| ढैया | शनि की राशि | से | तक |
|---|---|---|---|
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कुंभ | 29 अप्रैल 2022 | 12 जुल॰ 2022 |
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कुंभ | 17 जन॰ 2023 | 29 मार्च 2025 |
| अष्टम शनि (आठवाँ भाव) | मिथुन | 31 मई 2032 | 13 जुल॰ 2034 |
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कुंभ | 25 फ़र॰ 2052 | 14 मई 2054 |
| कंटक शनि (चौथा भाव) | कुंभ | 2 सित॰ 2054 | 5 फ़र॰ 2055 |
कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।
अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।
साढ़ेसाती और ढैया में उपाय
- मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
- शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
- ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
- पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।
हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र
तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।
अपनी चंद्र राशि नहीं पता?
साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।
दूसरी राशियों की साढ़ेसाती
सवाल-जवाब
वृश्चिक राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल
वृश्चिक राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?
वृश्चिक राशि की अगली साढ़ेसाती 29 जन॰ 2041 से 4 दिस॰ 2049 तक है।
वृश्चिक राशि पर ढैया कब है?
अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 31 मई 2032 – 13 जुल॰ 2034; कंटक शनि (चौथा भाव): 25 फ़र॰ 2052 – 14 मई 2054; कंटक शनि (चौथा भाव): 2 सित॰ 2054 – 5 फ़र॰ 2055।
वृश्चिक राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?
पहला चरण: तुला। शनि तुला में उच्च के हैं, अपनी सबसे मज़बूत राशि में, और शास्त्रों के अनुसार इससे यह दौर काफ़ी हल्का हो जाता है। दूसरा (मध्य) चरण: वृश्चिक। शनि वृश्चिक में हैं, जो उनके शत्रु मंगल की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें। तीसरा (अंतिम) चरण: धनु। शनि धनु में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।
साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?
मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।