शनि की साढ़ेसाती · ♎ तुला (Libra)

तुला राशि पर शनि की साढ़ेसाती

तुला चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

अभी साढ़ेसाती या ढैया नहीं है। अगली साढ़ेसाती 22 अक्टू॰ 2038 से शुरू होगी।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

तुला राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

10 सित॰ 2009 – 26 अक्टू॰ 2017

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणकन्या10 सित॰ 200915 नव॰ 2011
दूसरा (मध्य) चरणतुला15 नव॰ 201116 मई 2012
पहला चरणकन्या16 मई 20124 अग॰ 2012
दूसरा (मध्य) चरणतुला4 अग॰ 20122 नव॰ 2014
तीसरा (अंतिम) चरणवृश्चिक2 नव॰ 201426 जन॰ 2017
तीसरा (अंतिम) चरणवृश्चिक21 जून 201726 अक्टू॰ 2017

22 अक्टू॰ 2038 – 8 दिस॰ 2046

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणकन्या22 अक्टू॰ 20385 अप्रैल 2039
पहला चरणकन्या13 जुल॰ 203929 जन॰ 2041
दूसरा (मध्य) चरणतुला29 जन॰ 20415 फ़र॰ 2041
पहला चरणकन्या5 फ़र॰ 204126 सित॰ 2041
दूसरा (मध्य) चरणतुला26 सित॰ 204112 दिस॰ 2043
तीसरा (अंतिम) चरणवृश्चिक12 दिस॰ 204323 जून 2044
दूसरा (मध्य) चरणतुला23 जून 204430 अग॰ 2044
तीसरा (अंतिम) चरणवृश्चिक30 अग॰ 20448 दिस॰ 2046

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (कन्या)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि कन्या में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (तुला)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि तुला में उच्च के हैं, अपनी सबसे मज़बूत राशि में, और शास्त्रों के अनुसार इससे यह दौर काफ़ी हल्का हो जाता है।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (वृश्चिक)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि वृश्चिक में हैं, जो उनके शत्रु मंगल की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। तुला राशि के लिए ये मकर और वृषभ हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
कंटक शनि (चौथा भाव)मकर24 जन॰ 202029 अप्रैल 2022
कंटक शनि (चौथा भाव)मकर12 जुल॰ 202217 जन॰ 2023
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)वृषभ8 अग॰ 20295 अक्टू॰ 2029
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)वृषभ17 अप्रैल 203031 मई 2032
कंटक शनि (चौथा भाव)मकर6 मार्च 204910 जुल॰ 2049
कंटक शनि (चौथा भाव)मकर4 दिस॰ 204925 फ़र॰ 2052
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)वृषभ28 मई 20591 जन॰ 2061

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

तुला राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

तुला राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

तुला राशि की अगली साढ़ेसाती 22 अक्टू॰ 2038 से 8 दिस॰ 2046 तक है।

तुला राशि पर ढैया कब है?

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 8 अग॰ 2029 – 5 अक्टू॰ 2029; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 17 अप्रैल 2030 – 31 मई 2032; कंटक शनि (चौथा भाव): 6 मार्च 2049 – 10 जुल॰ 2049।

तुला राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: कन्या। शनि कन्या में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है। दूसरा (मध्य) चरण: तुला। शनि तुला में उच्च के हैं, अपनी सबसे मज़बूत राशि में, और शास्त्रों के अनुसार इससे यह दौर काफ़ी हल्का हो जाता है। तीसरा (अंतिम) चरण: वृश्चिक। शनि वृश्चिक में हैं, जो उनके शत्रु मंगल की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।