शनि की साढ़ेसाती · ♋ कर्क (Cancer)

कर्क राशि पर शनि की साढ़ेसाती

कर्क चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

अभी साढ़ेसाती या ढैया नहीं है। अगली साढ़ेसाती 31 मई 2032 से शुरू होगी।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

कर्क राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

23 जुल॰ 2002 – 10 सित॰ 2009

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणमिथुन23 जुल॰ 20028 जन॰ 2003
पहला चरणमिथुन7 अप्रैल 20036 सित॰ 2004
दूसरा (मध्य) चरणकर्क6 सित॰ 200413 जन॰ 2005
पहला चरणमिथुन13 जन॰ 200526 मई 2005
दूसरा (मध्य) चरणकर्क26 मई 20051 नव॰ 2006
तीसरा (अंतिम) चरणसिंह1 नव॰ 200610 जन॰ 2007
दूसरा (मध्य) चरणकर्क10 जन॰ 200716 जुल॰ 2007
तीसरा (अंतिम) चरणसिंह16 जुल॰ 200710 सित॰ 2009

31 मई 2032 – 13 जुल॰ 2039

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणमिथुन31 मई 203213 जुल॰ 2034
दूसरा (मध्य) चरणकर्क13 जुल॰ 203427 अग॰ 2036
तीसरा (अंतिम) चरणसिंह27 अग॰ 203622 अक्टू॰ 2038
तीसरा (अंतिम) चरणसिंह5 अप्रैल 203913 जुल॰ 2039

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (मिथुन)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि मिथुन में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (कर्क)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि कर्क में हैं, जो उनके शत्रु चंद्र की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (सिंह)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि सिंह में हैं, जो उनके शत्रु सूर्य की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। कर्क राशि के लिए ये तुला और कुंभ हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कुंभ29 अप्रैल 202212 जुल॰ 2022
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कुंभ17 जन॰ 202329 मार्च 2025
कंटक शनि (चौथा भाव)तुला29 जन॰ 20415 फ़र॰ 2041
कंटक शनि (चौथा भाव)तुला26 सित॰ 204112 दिस॰ 2043
कंटक शनि (चौथा भाव)तुला23 जून 204430 अग॰ 2044
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कुंभ25 फ़र॰ 205214 मई 2054
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कुंभ2 सित॰ 20545 फ़र॰ 2055

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

कर्क राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

कर्क राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

कर्क राशि की अगली साढ़ेसाती 31 मई 2032 से 13 जुल॰ 2039 तक है।

कर्क राशि पर ढैया कब है?

कंटक शनि (चौथा भाव): 29 जन॰ 2041 – 5 फ़र॰ 2041; कंटक शनि (चौथा भाव): 26 सित॰ 2041 – 12 दिस॰ 2043; कंटक शनि (चौथा भाव): 23 जून 2044 – 30 अग॰ 2044।

कर्क राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: मिथुन। शनि मिथुन में हैं, जो उनके मित्र बुध की राशि है, इसलिए दबाव आमतौर पर सँभलने लायक़ रहता है। दूसरा (मध्य) चरण: कर्क। शनि कर्क में हैं, जो उनके शत्रु चंद्र की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें। तीसरा (अंतिम) चरण: सिंह। शनि सिंह में हैं, जो उनके शत्रु सूर्य की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।