शनि की साढ़ेसाती · ♐ धनु (Sagittarius)

धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती

धनु चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

साढ़ेसाती नहीं है, पर शनि की ढैया चल रही है: कंटक शनि (चौथा भाव), 3 जून 2027 तक।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

धनु राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

2 नव॰ 2014 – 17 जन॰ 2023

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणवृश्चिक2 नव॰ 201426 जन॰ 2017
दूसरा (मध्य) चरणधनु26 जन॰ 201721 जून 2017
पहला चरणवृश्चिक21 जून 201726 अक्टू॰ 2017
दूसरा (मध्य) चरणधनु26 अक्टू॰ 201724 जन॰ 2020
तीसरा (अंतिम) चरणमकर24 जन॰ 202029 अप्रैल 2022
तीसरा (अंतिम) चरणमकर12 जुल॰ 202217 जन॰ 2023

12 दिस॰ 2043 – 25 फ़र॰ 2052

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणवृश्चिक12 दिस॰ 204323 जून 2044
पहला चरणवृश्चिक30 अग॰ 20448 दिस॰ 2046
दूसरा (मध्य) चरणधनु8 दिस॰ 20466 मार्च 2049
तीसरा (अंतिम) चरणमकर6 मार्च 204910 जुल॰ 2049
दूसरा (मध्य) चरणधनु10 जुल॰ 20494 दिस॰ 2049
तीसरा (अंतिम) चरणमकर4 दिस॰ 204925 फ़र॰ 2052

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (वृश्चिक)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि वृश्चिक में हैं, जो उनके शत्रु मंगल की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (धनु)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि धनु में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (मकर)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि अपनी ही राशि मकर में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। धनु राशि के लिए ये मीन और कर्क हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
कंटक शनि (चौथा भाव)मीन29 मार्च 20253 जून 2027
कंटक शनि (चौथा भाव)मीन20 अक्टू॰ 202723 फ़र॰ 2028
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कर्क13 जुल॰ 203427 अग॰ 2036
कंटक शनि (चौथा भाव)मीन14 मई 20542 सित॰ 2054
कंटक शनि (चौथा भाव)मीन5 फ़र॰ 20557 अप्रैल 2057

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

धनु राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

धनु राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

धनु राशि की अगली साढ़ेसाती 12 दिस॰ 2043 से 25 फ़र॰ 2052 तक है।

धनु राशि पर ढैया कब है?

कंटक शनि (चौथा भाव): 29 मार्च 2025 – 3 जून 2027; कंटक शनि (चौथा भाव): 20 अक्टू॰ 2027 – 23 फ़र॰ 2028; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 13 जुल॰ 2034 – 27 अग॰ 2036।

धनु राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: वृश्चिक। शनि वृश्चिक में हैं, जो उनके शत्रु मंगल की राशि है; परंपरा इस दौर को भारी मानती है, इसलिए संयम से चलें। दूसरा (मध्य) चरण: धनु। शनि धनु में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल। तीसरा (अंतिम) चरण: मकर। शनि अपनी ही राशि मकर में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।