शनि की साढ़ेसाती · ♒ कुंभ (Aquarius)

कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती

कुंभ चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

साढ़ेसाती चल रही है: तीसरा (अंतिम) चरण। यह 23 फ़र॰ 2028 को समाप्त होगी।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

कुंभ राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

21 मार्च 1990 – 17 अप्रैल 1998

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणमकर21 मार्च 199020 जून 1990
पहला चरणमकर15 दिस॰ 19905 मार्च 1993
दूसरा (मध्य) चरणकुंभ5 मार्च 199315 अक्टू॰ 1993
पहला चरणमकर15 अक्टू॰ 199310 नव॰ 1993
दूसरा (मध्य) चरणकुंभ10 नव॰ 19932 जून 1995
तीसरा (अंतिम) चरणमीन2 जून 199510 अग॰ 1995
दूसरा (मध्य) चरणकुंभ10 अग॰ 199516 फ़र॰ 1996
तीसरा (अंतिम) चरणमीन16 फ़र॰ 199617 अप्रैल 1998

24 जन॰ 2020 – 23 फ़र॰ 2028

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणमकर24 जन॰ 202029 अप्रैल 2022
दूसरा (मध्य) चरणकुंभ29 अप्रैल 202212 जुल॰ 2022
पहला चरणमकर12 जुल॰ 202217 जन॰ 2023
दूसरा (मध्य) चरणकुंभ17 जन॰ 202329 मार्च 2025
तीसरा (अंतिम) चरणमीन29 मार्च 20253 जून 2027
तीसरा (अंतिम) चरणमीन20 अक्टू॰ 202723 फ़र॰ 2028

6 मार्च 2049 – 7 अप्रैल 2057

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणमकर6 मार्च 204910 जुल॰ 2049
पहला चरणमकर4 दिस॰ 204925 फ़र॰ 2052
दूसरा (मध्य) चरणकुंभ25 फ़र॰ 205214 मई 2054
तीसरा (अंतिम) चरणमीन14 मई 20542 सित॰ 2054
दूसरा (मध्य) चरणकुंभ2 सित॰ 20545 फ़र॰ 2055
तीसरा (अंतिम) चरणमीन5 फ़र॰ 20557 अप्रैल 2057

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (मकर)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि अपनी ही राशि मकर में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (कुंभ)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि अपनी ही राशि कुंभ में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (मीन)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि मीन में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। कुंभ राशि के लिए ये वृषभ और कन्या हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
कंटक शनि (चौथा भाव)वृषभ8 अग॰ 20295 अक्टू॰ 2029
कंटक शनि (चौथा भाव)वृषभ17 अप्रैल 203031 मई 2032
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कन्या22 अक्टू॰ 20385 अप्रैल 2039
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कन्या13 जुल॰ 203929 जन॰ 2041
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)कन्या5 फ़र॰ 204126 सित॰ 2041
कंटक शनि (चौथा भाव)वृषभ28 मई 20591 जन॰ 2061

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

कुंभ राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

कुंभ राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

कुंभ राशि की चल रही साढ़ेसाती 24 जन॰ 2020 से 23 फ़र॰ 2028 तक है। उसके बाद अगली साढ़ेसाती 6 मार्च 2049 – 7 अप्रैल 2057 है।

कुंभ राशि पर ढैया कब है?

कंटक शनि (चौथा भाव): 8 अग॰ 2029 – 5 अक्टू॰ 2029; कंटक शनि (चौथा भाव): 17 अप्रैल 2030 – 31 मई 2032; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 22 अक्टू॰ 2038 – 5 अप्रैल 2039।

कुंभ राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: मकर। शनि अपनी ही राशि मकर में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है। दूसरा (मध्य) चरण: कुंभ। शनि अपनी ही राशि कुंभ में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है। तीसरा (अंतिम) चरण: मीन। शनि मीन में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।