शनि की साढ़ेसाती · ♓ मीन (Pisces)

मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती

मीन चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

साढ़ेसाती चल रही है: दूसरा (मध्य) चरण। यह 17 अप्रैल 2030 को समाप्त होगी।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

मीन राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

5 मार्च 1993 – 7 जून 2000

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणकुंभ5 मार्च 199315 अक्टू॰ 1993
पहला चरणकुंभ10 नव॰ 19932 जून 1995
दूसरा (मध्य) चरणमीन2 जून 199510 अग॰ 1995
पहला चरणकुंभ10 अग॰ 199516 फ़र॰ 1996
दूसरा (मध्य) चरणमीन16 फ़र॰ 199617 अप्रैल 1998
तीसरा (अंतिम) चरणमेष17 अप्रैल 19987 जून 2000

29 अप्रैल 2022 – 17 अप्रैल 2030

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणकुंभ29 अप्रैल 202212 जुल॰ 2022
पहला चरणकुंभ17 जन॰ 202329 मार्च 2025
दूसरा (मध्य) चरणमीन29 मार्च 20253 जून 2027
तीसरा (अंतिम) चरणमेष3 जून 202720 अक्टू॰ 2027
दूसरा (मध्य) चरणमीन20 अक्टू॰ 202723 फ़र॰ 2028
तीसरा (अंतिम) चरणमेष23 फ़र॰ 20288 अग॰ 2029
तीसरा (अंतिम) चरणमेष5 अक्टू॰ 202917 अप्रैल 2030

25 फ़र॰ 2052 – 28 मई 2059

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणकुंभ25 फ़र॰ 205214 मई 2054
दूसरा (मध्य) चरणमीन14 मई 20542 सित॰ 2054
पहला चरणकुंभ2 सित॰ 20545 फ़र॰ 2055
दूसरा (मध्य) चरणमीन5 फ़र॰ 20557 अप्रैल 2057
तीसरा (अंतिम) चरणमेष7 अप्रैल 205728 मई 2059

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (कुंभ)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि अपनी ही राशि कुंभ में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (मीन)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि मीन में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (मेष)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि मेष में नीच के हैं, अपनी सबसे कमज़ोर राशि में; परंपरा इसे ज़्यादा कठिन दौर मानती है, जहाँ धैर्य और विनम्रता सबसे ज़्यादा काम आते हैं।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। मीन राशि के लिए ये मिथुन और तुला हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
कंटक शनि (चौथा भाव)मिथुन31 मई 203213 जुल॰ 2034
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)तुला29 जन॰ 20415 फ़र॰ 2041
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)तुला26 सित॰ 204112 दिस॰ 2043
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)तुला23 जून 204430 अग॰ 2044

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

मीन राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

मीन राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

मीन राशि की चल रही साढ़ेसाती 29 अप्रैल 2022 से 17 अप्रैल 2030 तक है। उसके बाद अगली साढ़ेसाती 25 फ़र॰ 2052 – 28 मई 2059 है।

मीन राशि पर ढैया कब है?

कंटक शनि (चौथा भाव): 31 मई 2032 – 13 जुल॰ 2034; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 29 जन॰ 2041 – 5 फ़र॰ 2041; अष्टम शनि (आठवाँ भाव): 26 सित॰ 2041 – 12 दिस॰ 2043।

मीन राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: कुंभ। शनि अपनी ही राशि कुंभ में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है। दूसरा (मध्य) चरण: मीन। शनि मीन में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल। तीसरा (अंतिम) चरण: मेष। शनि मेष में नीच के हैं, अपनी सबसे कमज़ोर राशि में; परंपरा इसे ज़्यादा कठिन दौर मानती है, जहाँ धैर्य और विनम्रता सबसे ज़्यादा काम आते हैं।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।