शनि की साढ़ेसाती · ♑ मकर (Capricorn)

मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती

मकर चंद्र राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती और ढैया कब हैं, हर चरण में शनि किस राशि में हैं और उसका क्या अर्थ है, और कौन-से उपाय किए जाते हैं।

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आज · 28 अक्टू॰ 2026

अभी साढ़ेसाती या ढैया नहीं है। अगली साढ़ेसाती 8 दिस॰ 2046 से शुरू होगी।

साढ़ेसाती की तारीख़ें

मकर राशि की 1990 से 2060 तक की हर साढ़ेसाती, हर चरण के साथ। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो कोई चरण दो बार दिखता है।

26 जन॰ 2017 – 29 मार्च 2025

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणधनु26 जन॰ 201721 जून 2017
पहला चरणधनु26 अक्टू॰ 201724 जन॰ 2020
दूसरा (मध्य) चरणमकर24 जन॰ 202029 अप्रैल 2022
तीसरा (अंतिम) चरणकुंभ29 अप्रैल 202212 जुल॰ 2022
दूसरा (मध्य) चरणमकर12 जुल॰ 202217 जन॰ 2023
तीसरा (अंतिम) चरणकुंभ17 जन॰ 202329 मार्च 2025

8 दिस॰ 2046 – 5 फ़र॰ 2055

चरणशनि की राशिसेतक
पहला चरणधनु8 दिस॰ 20466 मार्च 2049
दूसरा (मध्य) चरणमकर6 मार्च 204910 जुल॰ 2049
पहला चरणधनु10 जुल॰ 20494 दिस॰ 2049
दूसरा (मध्य) चरणमकर4 दिस॰ 204925 फ़र॰ 2052
तीसरा (अंतिम) चरणकुंभ25 फ़र॰ 205214 मई 2054
तीसरा (अंतिम) चरणकुंभ2 सित॰ 20545 फ़र॰ 2055

हर चरण का आप पर असर

पहला चरण: शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में (धनु)

पहले ढाई साल। परंपरा में बारहवाँ भाव ख़र्च, यात्रा, नींद और घर से दूरी से जुड़ा है: फ़िज़ूलख़र्ची रोकें, सोच-समझकर योजना बनाएँ और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ न लें।

शनि धनु में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल।

दूसरा (मध्य) चरण: शनि चंद्र राशि पर (मकर)

साढ़ेसाती का मुख्य भाग, जब शनि स्वयं चंद्रमा पर होते हैं। ज़िम्मेदारियाँ और मन व सेहत पर दबाव सबसे ज़्यादा यहीं महसूस होता है; धीमी, ईमानदार और लगातार मेहनत ही फल देती है।

शनि अपनी ही राशि मकर में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

तीसरा (अंतिम) चरण: शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में (कुंभ)

अंतिम ढाई साल, धन, परिवार और वाणी के दूसरे भाव से। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे संभलती है और इस दौर की सीख पक्की होती है; वाणी और बचत पर ध्यान रखें।

शनि अपनी ही राशि कुंभ में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

शनि की ढैया की तारीख़ें

ढैया (ढाई साल) तब होती है जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में हों। मकर राशि के लिए ये मेष और सिंह हैं।

ढैयाशनि की राशिसेतक
कंटक शनि (चौथा भाव)मेष3 जून 202720 अक्टू॰ 2027
कंटक शनि (चौथा भाव)मेष23 फ़र॰ 20288 अग॰ 2029
कंटक शनि (चौथा भाव)मेष5 अक्टू॰ 202917 अप्रैल 2030
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)सिंह27 अग॰ 203622 अक्टू॰ 2038
अष्टम शनि (आठवाँ भाव)सिंह5 अप्रैल 203913 जुल॰ 2039
कंटक शनि (चौथा भाव)मेष7 अप्रैल 205728 मई 2059

कंटक शनि (चौथा भाव): चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि घर, संपत्ति, माता और मन की शांति को छूते हैं। काग़ज़ात ठीक रखें और जल्दबाज़ी में घर बदलने या ख़रीदारी से बचें।

अष्टम शनि (आठवाँ भाव): चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि भारी ढैया माने जाते हैं: सेहत, अचानक आने वाली रुकावटें और छिपे मामले सावधानी माँगते हैं। जोखिम से बचें, जाँच करवाते रहें और धैर्य रखें।

साढ़ेसाती और ढैया में उपाय

  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  • ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या गर्म कपड़े दान करें, और कर्मचारियों व बुज़ुर्गों का सम्मान करें।
  • पूरी कुंडली दिखाए बिना नीलम न पहनें: यह सबसे तेज़ रत्नों में है और नुक़सान भी कर सकता है।

हनुमान चालीसा · शनि चालीसा · दशरथ कृत शनि स्तोत्र · शनि बीज मंत्र

तारीख़ें शनि के निरयण (लाहिड़ी) गोचर से हैं और प्रमुख पंचांगों से दिन तक मिलती हैं। फल परंपरागत प्रवृत्तियाँ हैं, भविष्यवाणी नहीं; आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा उतनी ही मायने रखती है जितना शनि का गोचर।

अपनी चंद्र राशि नहीं पता?

साढ़ेसाती चंद्र राशि से गिनी जाती है, सूर्य राशि से नहीं। मुफ़्त जन्म कुंडली से कुछ सेकंड में अपनी राशि जानें।

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दूसरी राशियों की साढ़ेसाती

सवाल-जवाब

मकर राशि की साढ़ेसाती से जुड़े सवाल

मकर राशि की साढ़ेसाती कब ख़त्म होगी?

मकर राशि की अगली साढ़ेसाती 8 दिस॰ 2046 से 5 फ़र॰ 2055 तक है।

मकर राशि पर ढैया कब है?

कंटक शनि (चौथा भाव): 3 जून 2027 – 20 अक्टू॰ 2027; कंटक शनि (चौथा भाव): 23 फ़र॰ 2028 – 8 अग॰ 2029; कंटक शनि (चौथा भाव): 5 अक्टू॰ 2029 – 17 अप्रैल 2030।

मकर राशि की साढ़ेसाती में शनि कहाँ होते हैं?

पहला चरण: धनु। शनि धनु में हैं, जो गुरु की राशि है और शनि के लिए सम है: जितनी मेहनत, उतना फल। दूसरा (मध्य) चरण: मकर। शनि अपनी ही राशि मकर में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है। तीसरा (अंतिम) चरण: कुंभ। शनि अपनी ही राशि कुंभ में हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार वे स्थिर और रचनात्मक फल देते हैं: ईमानदार मेहनत का फल मिलता है।

साढ़ेसाती में कौन-से उपाय करें?

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।