मंत्र और चालीसा · शनि

शनि बीज मंत्र: अर्थ और जाप विधि

शनि का बीज मंत्र, जिसका जाप परंपरा के अनुसार शनिवार को किया जाता है, उसके अर्थ और नवग्रह स्तोत्र के श्लोक के साथ।

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शनि बीज मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥

Om Praam Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah

शनि बीज मंत्र का अर्थ

  • ॐ वह आदि ध्वनि है, जिससे अधिकतर वैदिक मंत्र शुरू होते हैं।
  • प्रां प्रीं प्रौं बीज अक्षर हैं। इनका शब्दशः अनुवाद नहीं होता; परंपरा में इन्हें शनि की ऊर्जा का ध्वनि-रूप माना जाता है, और 'सः' आवाहन को पूरा करता है।
  • शनैश्चराय नमः का अर्थ है "शनि को नमस्कार"।

शनि मंत्र क्यों जपा जाता है

शनि अनुशासन, परिश्रम, न्याय और देरी का ग्रह है। परंपरा के अनुसार शनि बीज मंत्र धैर्य और लगन के लिए, देरी के बाद स्थिर प्रगति के लिए, और साढ़ेसाती, ढैया या शनि की कठिन महादशा में राहत के लिए जपा जाता है।

नवग्रह स्तोत्र में शनि का श्लोक

शनि का यह श्लोक महर्षि व्यास रचित माने जाने वाले नवग्रह स्तोत्र से है। बहुत से लोग बीज मंत्र से पहले या बाद में इसका पाठ करते हैं।

नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥Nilanjana-samabhasam Ravi-putram YamagrajamChhaya-Martanda-sambhutam tam namami Shanaishcharam
जो नीले अंजन (काजल) के समान आभा वाले हैं, सूर्य के पुत्र और यमराज के बड़े भाई हैं, और छाया व मार्तंड (सूर्य) से उत्पन्न हुए हैं, उन शनैश्चर को मैं नमस्कार करता हूँ।

शनि मंत्र की पारंपरिक जाप विधि

  • दिन: जाप शनिवार से शुरू करें, जो शनि का दिन है।
  • संख्या: आमतौर पर बताई जाने वाली कुल जाप संख्या 23,000 है, यानी 108 मनकों की माला से लगभग 213 माला, जिसे आमतौर पर कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  • रोज़ का अभ्यास: बहुत से लोग रोज़, या हर शनिवार, केवल एक माला (108 बार) जपते हैं।
  • स्नान के बाद, किसी साफ़ और शांत जगह पर, ध्वनि पर ध्यान रखते हुए जाप करें।

इसका दिन शनिवार है और शाम का समय पारंपरिक माना जाता है। बहुत से लोग पीपल के नीचे या शनि मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाते हैं, काले या गहरे नीले वस्त्र पहनते हैं, और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि शनिदेव हनुमान जी के भक्तों को कष्ट नहीं देते।

शनि मंत्र और आपका मूलांक

अंक ज्योतिष में शनि अंक 8 का स्वामी है: मूलांक 8, यानी किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख़ को जन्मे लोग, और भाग्यांक 8। इन अंकों वाले लोग अक्सर ग्रह के शुभ गुण बढ़ाने के लिए शनि मंत्र का जाप करते हैं।

शनि के लिए इनका पाठ भी परंपरा से किया जाता है: हनुमान चालीसा, शनि चालीसा, दशरथ कृत शनि स्तोत्र और नवग्रह स्तोत्र।

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मंत्र और चालीसा आस्था और परंपरा का विषय हैं, और अलग-अलग परिवारों व गुरुओं की विधि में अंतर होता है। यहाँ दी गई जानकारी चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है।

सवाल-जवाब

शनि मंत्र: सवाल-जवाब

शनि बीज मंत्र क्या है?

शनि बीज मंत्र है: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥ (Om Praam Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah)। वैदिक ज्योतिष में यह शनि का बीज मंत्र है।

शनि मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?

आमतौर पर बताई जाने वाली पारंपरिक कुल संख्या 23,000 है, जिसे 108 की मालाओं में कई दिनों में पूरा किया जाता है। रोज़ के अभ्यास के लिए एक माला (108 बार) आम है।

शनि मंत्र का जाप किस दिन करना चाहिए?

शनिवार को, जो शनि का दिन है। बहुत से लोग जाप शनिवार से शुरू करते हैं और फिर रोज़ जपते हैं।

किस मूलांक वालों को शनि मंत्र जपना चाहिए?

शनि अंक 8 का स्वामी है, इसलिए शनि मंत्र सबसे ज़्यादा मूलांक 8 और भाग्यांक 8 से जुड़ा है। कोई भी इसका जाप कर सकता है, ख़ासकर जब कुंडली में शनि कमज़ोर हो।

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