मंत्र और चालीसा
नवग्रह बीज मंत्र
वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रहों के बीज मंत्र, उनका अर्थ, जाप का दिन और उनसे जुड़ा मूलांक।
बीज मंत्र क्या होता है?
बीज मंत्र एक छोटा मंत्र होता है, जो ह्रां या श्रीं जैसे एकाक्षरी बीज अक्षरों से बनता है। वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रहों, यानी नवग्रहों, में से हर ग्रह का अपना बीज मंत्र है, जिसे परंपरा में उस ग्रह की ऊर्जा का ध्वनि-रूप माना जाता है।
हर नवग्रह बीज मंत्र एक ही ढाँचे में होता है: ॐ, तीन बीज अक्षर, 'सः', और ग्रह को नमस्कार, जैसे 'शनैश्चराय नमः', यानी शनिदेव को नमस्कार।
आपको कौन सा नवग्रह मंत्र जपना चाहिए?
वैदिक अंक ज्योतिष में 1 से 9 तक हर अंक का एक स्वामी ग्रह है। बहुत से लोग अपने मूलांक (जन्म की तारीख़ से) या भाग्यांक (पूरी जन्मतिथि से) के स्वामी ग्रह का मंत्र जपते हैं; दोनों आप हमारे मूलांक और भाग्यांक कैलकुलेटर से जान सकते हैं।
ज्योतिष में कुंडली के कमज़ोर या पीड़ित ग्रह का, या जिस ग्रह की महादशा चल रही हो उसका मंत्र भी आमतौर पर जपा जाता है। परंपराएँ अलग-अलग हैं, इसलिए अपने परिवार की रीति या किसी भरोसेमंद गुरु की सलाह मानें।
नौ बीज मंत्र एक नज़र में
| ग्रह | बीज मंत्र | मूलांक |
|---|---|---|
| सूर्यरविवार | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥ | 1 |
| चंद्रसोमवार | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः॥ | 2 |
| गुरु (गुरु (बृहस्पति))गुरुवार | ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥ | 3 |
| राहुशनिवार | ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥ | 4 |
| बुधबुधवार | ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥ | 5 |
| शुक्रशुक्रवार | ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥ | 6 |
| केतुमंगलवार | ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥ | 7 |
| शनिशनिवार | ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥ | 8 |
| मंगलमंगलवार | ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥ | 9 |
मंत्र और चालीसा आस्था और परंपरा का विषय हैं, और अलग-अलग परिवारों व गुरुओं की विधि में अंतर होता है। यहाँ दी गई जानकारी चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है।
चालीसा और स्तोत्र
- 40 चौपाई + 3 दोहेहनुमान चालीसातुलसीदास रचित हनुमान जी की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ साहस, रक्षा और मंगल व शनि के लिए किया जाता है।
- 41 चौपाई + 2 दोहेशिव चालीसाभगवान शिव की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर शांति और रक्षा के लिए किया जाता है।
- 41 चौपाईदुर्गा चालीसामाँ दुर्गा की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ नवरात्रि, शुक्रवार और अष्टमी पर शक्ति और रक्षा के लिए किया जाता है।
- 38 चौपाई + 3 दोहेगणेश चालीसाविघ्नहर्ता गणेश जी की स्तुति, जिसका पाठ बुधवार, संकष्टी और गणेश चतुर्थी पर और हर शुभ काम से पहले किया जाता है।
- 40 चौपाई + 4 दोहेश्री लक्ष्मी चालीसासमृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ शुक्रवार, दिवाली, धनतेरस और शरद पूर्णिमा पर होता है।
- 45 चौपाई + 2 दोहेश्री राम चालीसाश्री राम की स्तुति, जिसका पाठ राम नवमी, चैत्र नवरात्रि और गुरुवार को राम नाम की महिमा के लिए किया जाता है।
- 40 चौपाई + 3 दोहेश्री कृष्ण चालीसाश्री कृष्ण की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ जन्माष्टमी, एकादशी और बुधवार को किया जाता है।
- 40 चौपाई + 3 दोहेशनि चालीसाशनिदेव की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ शनिवार को और साढ़ेसाती व ढैय्या में शनि के कष्ट कम करने के लिए किया जाता है।
- 10 श्लोकदशरथ कृत शनि स्तोत्रपद्म पुराण से राजा दशरथ की शनिदेव स्तुति, जिसका पाठ शनिवार को और साढ़ेसाती में किया जाता है।
- 9 श्लोक + 3 फलश्रुतिनवग्रह स्तोत्रनौ ग्रहों की एक-एक श्लोक वाली व्यास रचित स्तुति, जिसका पाठ ग्रह शांति के लिए किया जाता है।
सवाल-जवाब
नवग्रह मंत्र: सवाल-जवाब
नवग्रह बीज मंत्र कौन से हैं?
ये वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रहों के बीज मंत्र हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु।
मुझे किस ग्रह का मंत्र जपना चाहिए?
सबसे आसान तरीक़ा है अपने मूलांक के स्वामी ग्रह का मंत्र जपना। ज्योतिषी कुंडली में कमज़ोर ग्रह का, या जिस ग्रह की दशा चल रही हो उसका मंत्र भी सुझाते हैं।
बीज मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?
रोज़ के अभ्यास के लिए एक माला, यानी 108 बार जपना आम है। हर ग्रह की एक पारंपरिक कुल जाप संख्या भी है, सूर्य के लिए 7,000 से लेकर शनि के लिए 23,000 तक, जिसे आमतौर पर कई दिनों में पूरा किया जाता है।
क्या बिना गुरु के बीज मंत्र जप सकते हैं?
नवग्रह बीज मंत्र बहुत से गृहस्थ बिना दीक्षा के जपते हैं। कुछ परंपराएँ इन्हें गुरु से सीखना बेहतर मानती हैं; अगर आपका परिवार किसी परंपरा को मानता है, तो उसी के अनुसार चलें।
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