मंत्र और चालीसा

श्री राम चालीसा: अर्थ सहित

सभी चौपाइयाँ और अंत के दो दोहे, हर पंक्ति के सरल हिंदी अर्थ के साथ।

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श्री राम चालीसा भगवान राम की सरल हिंदी स्तुति है। अंतिम पंक्तियों में कवि हरिदास का नाम आता है; उनके समय की जानकारी नहीं मिलती, और यह स्तुति घरों और मंदिरों में, ख़ासकर राम नवमी पर, गाई जाती है।

श्री राम चालीसा अर्थ सहित

  1. चौपाई 1

    श्री रघुबीर भक्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

    Shri Raghubir bhakt hitkariSuni leejai prabhu araj hamari

    हे भक्तों के हितकारी श्री रघुवीर, प्रभु, मेरी अर्ज़ी सुन लीजिए।

  2. चौपाई 2

    निशि दिन ध्यान धरै जो कोई।ता सम भक्त और नहिं होई॥

    Nishi din dhyan dharai jo koiTa sam bhakt aur nahin hoi

    जो दिन-रात आपका ध्यान करता है, उसके समान और कोई भक्त नहीं।

  3. चौपाई 3

    ध्यान धरे शिवजी मन माहीं।ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं पाहीं॥

    Dhyan dhare Shivji man mahinBrahma Indra paar nahin pahin

    शिव जी मन में आपका ध्यान करते हैं; ब्रह्मा और इंद्र भी आपका पार नहीं पाते।

  4. चौपाई 4

    जय जय जय रघुनाथ कृपाला।सदा करो सन्तन प्रतिपाला॥

    Jai jai jai Raghunath kripalaSada karo santan pratipala

    हे कृपालु रघुनाथ, आपकी जय हो; आप सदा संतों की रक्षा करते हैं।

  5. चौपाई 5

    दूत तुम्हार वीर हनुमाना।जासु प्रभाव तिहूँ पुर जाना॥

    Doot tumhar veer HanumanaJasu prabhav tihun pur jana

    आपके दूत वीर हनुमान हैं, जिनका प्रभाव तीनों लोक जानते हैं।

  6. चौपाई 6

    तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला।रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

    Tuv bhujdand prachand kripalaRavan mari suran pratipala

    हे कृपालु, आपकी प्रचंड भुजाओं ने रावण को मारकर देवताओं की रक्षा की।

  7. चौपाई 7

    तुम अनाथ के नाथ गोसाईं।दीनन के हो सदा सहाई॥

    Tum anath ke nath GosainDeenan ke ho sada sahai

    हे गोसाईं, आप अनाथों के नाथ हैं और सदा दीनों के सहायक हैं।

  8. चौपाई 8

    ब्रह्मादिक तव पार न पावैं।सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥

    Brahmadik tav paar na pavainSada Ish tumhro yash gavain

    ब्रह्मा आदि आपका पार नहीं पाते; हे ईश, वे सदा आपका यश गाते हैं।

  9. चौपाई 9

    चारिउ वेद भरत हैं साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखी॥

    Chariu Ved bharat hain sakhiTum bhaktan ki lajja rakhi

    चारों वेद साक्षी हैं कि आपने भक्तों की लाज रखी।

  10. चौपाई 10

    गुण गावत शारद मन माहीं।सुरपति ताको पार न पाहीं॥

    Gun gavat Sharad man mahinSurpati tako paar na pahin

    सरस्वती मन में आपके गुण गाती हैं; इंद्र भी उनका पार नहीं पाते।

  11. चौपाई 11

    नाम तुम्हार लेत जो कोई।ता सम धन्य और नहिं होई॥

    Nam tumhar let jo koiTa sam dhanya aur nahin hoi

    जो आपका नाम लेता है, उसके समान धन्य और कोई नहीं।

  12. चौपाई 12

    राम नाम है अपरम्पारा।चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥

    Ram nam hai aparamparaCharihu Vedan jahi pukara

    राम नाम अपरंपार है, जिसे चारों वेदों ने पुकारा है।

  13. चौपाई 13

    गणपति नाम तुम्हारो लीन्हों।तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हों॥

    Ganpati nam tumharo leenhonTinko pratham pujya tum keenhon

    गणपति ने आपका नाम लिया, और आपने उन्हें प्रथम पूज्य बना दिया।

  14. चौपाई 14

    शेष रटत नित नाम तुम्हारा।महि को भार शीश पर धारा॥

    Shesh ratat nit nam tumharaMahi ko bhar sheesh par dhara

    शेषनाग रोज़ आपका नाम रटते हैं और धरती का भार सिर पर धारण करते हैं।

  15. चौपाई 15

    फूल समान रहत सो भारा।पावत कोउ न तुम्हरो पारा॥

    Phool saman rahat so bharaPavat kou na tumhro para

    वह भार उन्हें फूल के समान लगता है; आपका पार कोई नहीं पाता।

  16. चौपाई 16

    भरत नाम तुम्हरो उर धारो।तासों कबहुँ न रण में हारो॥

    Bharat nam tumhro ur dharoTason kabahun na ran mein haro

    भरत ने आपका नाम हृदय में धारण किया, इसलिए वे कभी युद्ध में नहीं हारे।

  17. चौपाई 17

    नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा।सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥

    Nam Shatruhan hriday prakashaSumirat hot shatru kar nasha

    शत्रुघ्न के हृदय में आपका नाम प्रकाशित है; उसके स्मरण से शत्रुओं का नाश होता है।

  18. चौपाई 18

    लषन तुम्हारे आज्ञाकारी।सदा करत सन्तन रखवारी॥

    Lashan tumhare agyakariSada karat santan rakhvari

    आपके आज्ञाकारी लक्ष्मण सदा संतों की रखवाली करते हैं।

  19. चौपाई 19

    ताते रण जीते नहिं कोई।युद्ध जुरे यमहूँ किन होई॥

    Tate ran jeete nahin koiYuddh jure Yamahun kin hoi

    इसलिए युद्ध में उन्हें कोई नहीं जीत सकता, चाहे सामने यम ही क्यों न हों।

  20. चौपाई 20

    महा लक्ष्मी धर अवतारा।सब विधि करत पाप को छारा॥

    Maha Lakshmi dhar avataraSab vidhi karat pap ko chhara

    महालक्ष्मी का अवतार (सीता जी) हर तरह से पापों को राख कर देती हैं।

  21. चौपाई 21

    सीता राम पुनीता गायो।भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥

    Sita Ram punita gayoBhuvaneshwari prabhav dikhayo

    पवित्र सीता का राम के साथ गान हुआ, और उन्होंने भुवनेश्वरी का प्रभाव दिखाया।

  22. चौपाई 22

    घट सों प्रकट भई सो आई।जाको देखत चन्द्र लजाई॥

    Ghat son prakat bhai so aaiJako dekhat chandra lajai

    वे घड़े से प्रकट होकर आईं, जिन्हें देखकर चंद्रमा भी लजा जाता है।

  23. चौपाई 23

    सो तुमरे नित पांव पलोटत।नवो निधि चरणन में लोटत॥

    So tumre nit panv palotatNavo nidhi charanan mein lotat

    वे रोज़ आपके चरण दबाती हैं, और नव निधियाँ उनके चरणों में लोटती हैं।

  24. चौपाई 24

    सिद्धि अठारह मंगल कारी।सो तुम पर जावै बलिहारी॥

    Siddhi atharah mangal kariSo tum par javai balihari

    अठारह मंगलकारी सिद्धियाँ आप पर न्योछावर हैं।

  25. चौपाई 25

    औरहु जो अनेक प्रभुताई।सो सीतापति तुमहिं बनाई॥

    Aurahu jo anek prabhutaiSo Sitapati tumahin banai

    और जो भी अनेक प्रभुताएँ हैं, हे सीतापति, वे सब आपने ही बनाईं।

  26. चौपाई 26

    इच्छा ते कोटिन संसारा।रचत न लागत पल की बारा॥

    Ichchha te kotin sansaraRachat na lagat pal ki bara

    आपकी इच्छा से करोड़ों संसार रचने में पल भर भी नहीं लगता।

  27. चौपाई 27

    जो तुम्हरे चरनन चित लावै।ताको मुक्ति अवसि हो जावै॥

    Jo tumhre charanan chit lavaiTako mukti avasi ho javai

    जो आपके चरणों में मन लगाता है, उसकी मुक्ति अवश्य हो जाती है।

  28. चौपाई 28

    सुनहु राम तुम तात हमारे।तुमहिं भरत कुल-पूज्य प्रचारे॥

    Sunahu Ram tum tat hamareTumahin Bharat kul pujya prachare

    सुनिए राम, आप मेरे पिता हैं; भरत ने आपको कुल का पूज्य बताया।

  29. चौपाई 29

    तुमहिं देव कुल देव हमारे।तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥

    Tumahin dev kul dev hamareTum guru dev pran ke pyare

    आप ही मेरे देव और कुलदेव हैं; आप गुरु और प्राणों से भी प्यारे हैं।

  30. चौपाई 30

    जो कुछ हो सो तुमहीं राजा।जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥

    Jo kuchh ho so tumahin RajaJai jai jai prabhu rakho laja

    जो कुछ है, उसके राजा आप ही हैं; हे प्रभु, आपकी जय हो, मेरी लाज रखिए।

  31. चौपाई 31

    रामा आत्मा पोषण हारे।जय जय जय दशरथ के प्यारे॥

    Rama atma poshan hareJai jai jai Dashrath ke pyare

    हे राम, आप आत्मा का पोषण करने वाले हैं; हे दशरथ के प्यारे, आपकी जय हो।

  32. चौपाई 32

    जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा।निर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥

    Jai jai jai prabhu jyoti swaroopaNirgun Brahm akhand anupa

    हे ज्योति-स्वरूप प्रभु, आपकी जय हो; आप निर्गुण, अखंड और अनुपम ब्रह्म हैं।

  33. चौपाई 33

    सत्य सत्य जय सत्य-ब्रत स्वामी।सत्य सनातन अन्तर्यामी॥

    Satya satya jai satyavrat SwamiSatya sanatan antaryami

    सत्य, सत्य, हे सत्यव्रती स्वामी, आपकी जय हो; आप सनातन सत्य और अंतर्यामी हैं।

  34. चौपाई 34

    सत्य भजन तुम्हरो जो गावै।सो निश्चय चारों फल पावै॥

    Satya bhajan tumhro jo gavaiSo nishchay charon phal pavai

    जो सच्चे मन से आपका भजन गाता है, उसे निश्चय ही चारों फल मिलते हैं।

  35. चौपाई 35

    सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं।तुमने भक्तहिं सब सिद्धि दीन्हीं॥

    Satya shapath Gauripati keenhinTumne bhaktahin sab siddhi deenhin

    गौरीपति शिव ने सत्य शपथ ली कि आपने भक्तों को सब सिद्धियाँ दीं।

  36. चौपाई 36

    ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा।नमो नमो जय जगपति भूपा॥

    Gyan hriday do gyan swaroopaNamo namo jai jagpati bhupa

    हे ज्ञान-स्वरूप, मेरे हृदय को ज्ञान दीजिए; हे जगपति भूप, नमो नमो, आपकी जय हो।

  37. चौपाई 37

    धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा।नाम तुम्हार हरत संतापा॥

    Dhanya dhanya tum dhanya pratapaNam tumhar harat santapa

    धन्य है आपका प्रताप; आपका नाम सारे संताप हर लेता है।

  38. चौपाई 38

    सत्य शुद्ध देवन मुख गाया।बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥

    Satya shuddh devan mukh gayaBaji dundubhi shankh bajaya

    देवताओं ने आपको सत्य और शुद्ध गाया, और दुंदुभी व शंख बजे।

  39. चौपाई 39

    सत्य सत्य तुम सत्य सनातन।तुमहीं हो हमरे तन मन धन॥

    Satya satya tum satya sanatanTumahin ho hamre tan man dhan

    सत्य, सत्य, आप सनातन सत्य हैं; आप ही मेरे तन, मन और धन हैं।

  40. चौपाई 40

    याको पाठ करे जो कोई।ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

    Yako path kare jo koiGyan prakat take ur hoi

    जो इसका पाठ करता है, उसके हृदय में ज्ञान प्रकट होता है।

  41. चौपाई 41

    आवागमन मिटै तिहि केरा।सत्य वचन माने शिव मेरा॥

    Avagaman mitai tihi keraSatya vachan mane Shiv mera

    उसका आवागमन मिट जाता है; मेरे शिव इस वचन को सत्य मानते हैं।

  42. चौपाई 42

    और आस मन में जो ल्यावै।तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥

    Aur aas man mein jo lyavaiTulsi dal aru phool chadhavai

    जो मन में कोई और आशा रखे, वह तुलसी दल और फूल चढ़ाए,

  43. चौपाई 43

    साग पत्र सो भोग लगावै।सो नर सकल सिद्धता पावै॥

    Sag patra so bhog lagavaiSo nar sakal siddhata pavai

    और साग-पत्ते का भोग लगाए; वह मनुष्य सब सिद्धियाँ पाता है।

  44. चौपाई 44

    अन्त समय रघुबर पुर जाई।जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥

    Ant samay Raghubar pur jaiJahan janm Hari bhakt kahai

    अंत समय वह रघुवर के धाम जाता है, और जहाँ जन्म ले वहाँ हरि-भक्त कहलाता है।

  45. चौपाई 45

    श्री हरि दास कहै अरु गावै।सो वैकुण्ठ धाम को पावै॥

    Shri Haridas kahai aru gavaiSo Vaikunth dham ko pavai

    श्री हरिदास कहते और गाते हैं: वह वैकुंठ धाम को पाता है।

  46. अंतिम दोहा

    सात दिवस जो नेम कर पाठ करे चित लाय।हरिदास हरिकृपा से अवसि भक्ति को पाय॥

    Sat divas jo nem kar, path kare chit layHaridas Harikripa se, avasi bhakti ko pay

    हरिदास कहते हैं: जो सात दिन नियम से मन लगाकर पाठ करे, वह हरि की कृपा से अवश्य भक्ति पाता है।

  47. अंतिम दोहा

    राम चालीसा जो पढ़े रामचरण चित लाय।जो इच्छा मन में करै सकल सिद्ध हो जाय॥

    Ram Chalisa jo padhe, Ramcharan chit layJo ichchha man mein karai, sakal siddh ho jay

    जो राम के चरणों में मन लगाकर राम चालीसा पढ़े, उसकी मन की हर इच्छा पूरी हो जाती है।

श्री राम स्तुति: श्री रामचन्द्र कृपालु

रचना: गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका)

  1. श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं।नवकंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं॥

    Shri Ramchandra kripalu bhaju man haran bhav bhay darunamNavkanj lochan kanj mukh kar kanj pad kanjarunam

  2. कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुन्दरं।पटपीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥

    Kandarp aganit amit chhavi navneel neerad sundaramPatpeet manahu tadit ruchi shuchi naumi Janak sutavaram

  3. भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्यवंश निकन्दनं।रघुनन्द आनन्द कंद कोशलचन्द दशरथ नन्दनं॥

    Bhaju Deenbandhu Dinesh danav daityavansh nikandanamRaghunand anand kand Koshalchand Dashrath nandanam

  4. सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं।आजानुभुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं॥

    Sir mukut kundal tilak charu udaru ang vibhushanamAjanubhuj shar chap dhar sangram jit Khar Dushanam

  5. इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं।मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं॥

    Iti vadati Tulsidas Shankar Shesh muni man ranjanamMam hriday kanj nivas kuru kamadi khaldal ganjanam

हे मन, भवसागर के दारुण भय को हरने वाले कृपालु श्री रामचंद्र को भज, जिनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण नए लाल कमल जैसे हैं, जिनकी छवि अनगिनत कामदेवों से सुंदर है, जो नए नीले मेघ जैसे श्याम हैं और जिनका पीतांबर बिजली-सा चमकता है। तुलसीदास दीनबंधु, दानव-कुल को मिटाने वाले, रघुकुल के आनंद और दशरथ-नंदन, मुकुटधारी, धनुष-बाण वाले, खर-दूषण विजेता राम का गुण गाते हैं और प्रार्थना करते हैं कि वे उनके हृदय-कमल में बसकर काम आदि दुष्टों का नाश करें।

श्री रामचन्द्र कृपालु: अर्थ और पूजा विधि के साथ अलग पेज पर

श्री राम चालीसा के बारे में

इसका बड़ा भाग राम नाम की महिमा है: राम नाम लेकर गणेश प्रथम पूज्य बने, शेषनाग राम नाम रटते हुए धरती का भार फूल की तरह उठाते हैं, भरत और शत्रुघ्न इसी नाम से बल पाते हैं, और चारों वेद इसे अपरंपार कहते हैं।

इसमें सीता जी को लक्ष्मी का अवतार कहा गया है, जिनके चरणों में नव निधि और अठारह सिद्धियाँ हैं, और राम को निर्गुण, अखंड ब्रह्म भी और दशरथ के प्यारे भी। अंतिम चौपाइयों में पाठ का फल ज्ञान, आवागमन से मुक्ति और वैकुंठ धाम बताया गया है, और तुलसी दल व फूल के साथ सात दिन पाठ करने को कहा गया है।

श्री राम चालीसा की पारंपरिक पाठ विधि

  • स्नान करके राम दरबार की तस्वीर के सामने दीपक, तुलसी दल और फूल रखकर बैठें; 42वीं चौपाई में तुलसी दल और फूल चढ़ाने का उल्लेख है।
  • राम नवमी, पूरी चैत्र नवरात्रि, गुरुवार और एकादशी को इसका पाठ होता है।
  • पहले अंतिम दोहे में सात दिन नियम से पाठ करने को कहा गया है।
  • ज्योतिष में सूर्यवंशी राम की पूजा सूर्य ग्रह के लिए की जाती है।

श्री राम चालीसा और ग्रह

ज्योतिष में श्री राम चालीसा का पाठ आमतौर पर सूर्य के लिए किया जाता है। इसके साथ इन ग्रहों के बीज मंत्र भी जप सकते हैं:

यह भी पढ़ें

मंत्र और चालीसा आस्था और परंपरा का विषय हैं, और अलग-अलग परिवारों व गुरुओं की विधि में अंतर होता है। यहाँ दी गई जानकारी चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है।

सवाल-जवाब

श्री राम चालीसा: सवाल-जवाब

राम चालीसा किसने लिखी?

अंतिम चौपाई और पहले अंतिम दोहे में कवि हरिदास का नाम आता है। उनके समय का उल्लेख नहीं मिलता, इसलिए इसे परंपरागत स्तुति माना जाता है।

राम चालीसा का पाठ कब करें?

राम नवमी और चैत्र नवरात्रि में, गुरुवार और एकादशी को, या रोज़। अंतिम दोहे में सात दिन व्रत की तरह पाठ करने को कहा गया है।

क्या राम चालीसा और हनुमान चालीसा एक ही हैं?

नहीं। तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा हनुमान जी की स्तुति है, और राम चालीसा श्री राम और उनके नाम की महिमा की। बहुत से भक्त दोनों साथ पढ़ते हैं।

नवग्रह बीज मंत्र

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