त्योहार मुहूर्त

महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त

महाशिवरात्रि की तारीख़, निशीथ काल पूजा, चारों प्रहर की पूजा का समय, पारण और बड़े शहरों का मुहूर्त।

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महाशिवरात्रि · नई दिल्ली

शनिवार, 6 मार्च 2027

निशीथ पूजा (मध्यरात्रि)

12:08 am – 12:57 am, 7 मार्च

49 मिनट

प्रथम प्रहर पूजा
6:24 pm – 9:28 pm
द्वितीय प्रहर पूजा
9:28 pm – 12:32 am, 7 मार्च
तृतीय प्रहर पूजा
12:32 am – 3:36 am, 7 मार्च
चतुर्थ प्रहर पूजा
3:36 am – 6:40 am, 7 मार्च
पारण (व्रत खोलना)
6:40 am – 1:47 pm, 7 मार्च
चतुर्दशी आरंभ
12:04 pm
चतुर्दशी समाप्त
1:47 pm, 7 मार्च
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महाशिवरात्रि, शिव की महान रात्रि, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (अमांत पंचांग में माघ) को मनाई जाती है। भक्त व्रत रखते हैं, रात भर जागरण करते हैं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाते हैं।

महाशिवरात्रि उस दिन होती है जिस दिन निशीथ काल (मध्यरात्रि का मुहूर्त) में चतुर्दशी हो, और पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय भी निशीथ काल ही है। जो रात भर पूजा करते हैं, वे सूर्यास्त से सूर्योदय तक रात के चारों प्रहरों में चार बार पूजा करते हैं।

पारण अगली सुबह सूर्योदय के बाद, चतुर्दशी समाप्त होने से पहले और दिन के पहले तीन चौथाई भाग के भीतर किया जाता है।

भारत के शहरों का समय भारतीय मानक समय (IST) में है और विदेश के शहरों का वहाँ के स्थानीय समय में; सब प्रमुख पंचांगों से एक-दो मिनट के भीतर मिलते हैं। जो शहर सूची में नहीं है, उसका समय आमतौर पर सबसे पास के शहर से कुछ ही मिनट अलग होता है।

त्योहार और व्रत कैलेंडर

पूजा में पढ़ें

  • शिव चालीसा

    भगवान शिव की चालीस चौपाइयों वाली स्तुति, जिसका पाठ सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर शांति और रक्षा के लिए किया जाता है।

    शिव आरती

सवाल-जवाब

महाशिवरात्रि से जुड़े सवाल

चार प्रहर की पूजा क्या है?

सूर्यास्त से सूर्योदय तक की रात को चार बराबर भागों (प्रहरों) में बाँटकर हर प्रहर में शिव की पूजा: पहले प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद से अभिषेक की परंपरा है।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएँ?

जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफ़ेद फूल, चंदन और फल। तुलसी और केतकी के फूल शिव पूजा में नहीं चढ़ाए जाते।

महाशिवरात्रि का व्रत कब खोलें?

अगले दिन सूर्योदय के बाद, चतुर्दशी समाप्त होने से पहले। ऊपर पारण का सटीक समय दिया गया है।