आरती
दुर्गा आरती अर्थ सहित
संपूर्ण दुर्गा आरती, जय अम्बे गौरी, अंग्रेज़ी लिपि और सरल अर्थ के साथ। नवरात्रि के हर दिन और शुक्रवार को गाई जाने वाली आरती।
जय अम्बे गौरी माँ दुर्गा की वह आरती है जो उत्तर भारत में गाई जाती है, ख़ासकर नवरात्रि के हर दिन, अष्टमी और शुक्रवार को। इसके अंतिम पद में शिवानंद स्वामी का नाम आता है, और यह परंपरागत रूप से चली आ रही है।
दुर्गा आरती: आरती के बोल
रचना: परंपरागत (शिवानंद स्वामी का नाम)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुम को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी॥
Jai Ambe Gauri, maiya jai Shyama GauriTum ko nis din dhyavat Hari Brahma Shivji
माँग सिन्दूर विराजत टीको मृगमद को।उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको॥
Mang sindoor virajat teeko mrigmad koUjjval se do naina chandravadan neeko
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे।रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे॥
Kanak saman kalevar raktambar sajeRakt pushp gale mala kanth har saje
केहरि वाहन राजत खड्ग कृपान धारी।सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी॥
Kehari vahan rajat khadga kripan dhariSur nar muni jan sevat tinke dukh hari
कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती।कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति॥
Kanan kundal shobhit nasagre motiKotik chandra divakar sam rajat jyoti
शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती।धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती॥
Shumbh Nishumbh bidare Mahishasur ghatiDhumra vilochan naina nishdin madmati
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।मधु कैटभ दोउ मारे सुर भय दूर करे॥
Chand Mund sanhare, shonit beej hareMadhu Kaitabh dou mare sur bhay door kare
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी॥
Brahmani Rudrani tum Kamala raniAgam nigam bakhani tum Shiv patrani
चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों।बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू॥
Chaunsath yogin gavat nritya karat BhaironBajat tal mridang aur bajat damru
तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता।भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता॥
Tum ho jag ki mata tum hi ho bhartaBhaktan ki dukh harta sukh sampati karta
भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी।मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी॥
Bhuja char ati shobhit var mudra dhariMan vanchhit phal pavat devta nar nari
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती॥
Kanchan thal virajat agar kapur batiMal ketu mein rajat koti ratan jyoti
मां अम्बे की आरती जो कोई नर गावे।कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे॥
Maa Ambe ki aarti jo koi nar gaveKahat Shivanand Swami sukh sampati pave
अम्बे गौरी की जय हो, जिनका ध्यान विष्णु, ब्रह्मा और शिव दिन-रात करते हैं। आरती में माँग में सिंदूर, सोने जैसी काया, लाल वस्त्र, सिंह की सवारी और हाथ में खड्ग का वर्णन है; वे शुंभ-निशुंभ, महिषासुर, चंड-मुंड, रक्तबीज और मधु-कैटभ का संहार करने वाली, ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला, जग की माता और पालनहार हैं। शिवानंद स्वामी कहते हैं कि जो इसे गाता है उसे सुख-संपत्ति मिलती है।
इस आरती के बारे में
इसमें माँ के रूप का वर्णन है, माँग में सिंदूर, सोने जैसी काया, लाल वस्त्र, गले में लाल फूलों की माला, सिंह की सवारी और हाथ में खड्ग; शुंभ-निशुंभ, महिषासुर, चंड-मुंड, रक्तबीज और मधु-कैटभ पर विजय याद की गई है, और उन्हें ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला, जग की माता और पालनहार कहा गया है।
आरती कैसे करें
- थाली में घी (या कपूर) का दीपक जलाएँ, साथ में फूल, थोड़े अक्षत और धूप रखें।
- घंटी बजाते हुए गाते समय थाली को देवता के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ: परंपरा में चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरी प्रतिमा पर सात बार।
- आरती के बाद दीपक की लौ पर हाथ फेरकर आँखों और माथे से लगाएँ, और प्रसाद बाँटें।
दुर्गा चालीसा पढ़ें
यह आरती आमतौर पर चालीसा के ठीक बाद गाई जाती है; हर चौपाई के अर्थ के साथ चालीसा पढ़ें।
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सवाल-जवाब
दुर्गा आरती से जुड़े सवाल
दुर्गा आरती कब गाई जाती है?
दुर्गा पूजा के बाद, नवरात्रि में सुबह और शाम, अष्टमी और नवमी को, और शुक्रवार को। बहुत से घरों में दुर्गा चालीसा के पाठ के बाद गाई जाती है।
क्या जय अम्बे गौरी और दुर्गा आरती एक ही हैं?
हाँ। जय अम्बे गौरी उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा गाई जाने वाली दुर्गा आरती की पहली पंक्ति है; अम्बे और गौरी माँ दुर्गा के नाम हैं।