आरती
गणेश आरती अर्थ सहित
संपूर्ण गणेश आरती, जय गणेश जय गणेश देवा, अंग्रेज़ी लिपि और सरल अर्थ के साथ। हर पूजा में सबसे पहले गाई जाने वाली आरती।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा पूरे उत्तर भारत में गाई जाने वाली गणेश आरती है: हर पूजा में सबसे पहले, बुधवार को, संकष्टी और विनायक चतुर्थी पर, और गणेश चतुर्थी के दस दिनों में। यह परंपरागत रचना है; अंतिम पद में 'सूर श्याम' का उल्लेख है, जिसे कभी-कभी कवि सूरदास से जोड़ा जाता है।
गणेश आरती: आरती के बोल
रचना: परंपरागत
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।माता जाकी पारवती पिता महादेवा॥
Jai Ganesh jai Ganesh jai Ganesh devaMata jaki Parvati pita Mahadeva
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी।माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
Ekdant dayavant char bhuja dhariMathe par tilak sohe moose ki savari
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
Pan chadhe phal chadhe aur chadhe mevaLadduan ka bhog lage sant karein seva
अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया।बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
Andhe ko aankh det kodhin ko kayaBanjhan ko putra det nirdhan ko maya
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
Soor Shyam sharan aaye saphal keeje sevaJai Ganesh jai Ganesh jai Ganesh deva
गणेश देव की जय हो, जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं: एकदंत, दयालु, चार भुजाओं वाले, माथे पर तिलक और मूषक की सवारी। उन्हें पान, फल, मेवा और लड्डुओं का भोग लगता है; वे अंधे को आँख, रोगी को काया, निःसंतान को पुत्र और निर्धन को धन देते हैं। भक्त उनकी शरण में आकर अपनी सेवा सफल करने की प्रार्थना करता है।
इस आरती के बारे में
इसमें पार्वती और महादेव के पुत्र गणेश का वर्णन है: एकदंत, दयालु, चार भुजाओं वाले, माथे पर तिलक और मूषक की सवारी, जिन्हें पान, फल, मेवा और लड्डू चढ़ते हैं; वे अंधे को आँख, रोगी को काया, निःसंतान को पुत्र और निर्धन को धन देते हैं।
आरती कैसे करें
- थाली में घी (या कपूर) का दीपक जलाएँ, साथ में फूल, थोड़े अक्षत और धूप रखें।
- घंटी बजाते हुए गाते समय थाली को देवता के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ: परंपरा में चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरी प्रतिमा पर सात बार।
- आरती के बाद दीपक की लौ पर हाथ फेरकर आँखों और माथे से लगाएँ, और प्रसाद बाँटें।
गणेश चालीसा पढ़ें
यह आरती आमतौर पर चालीसा के ठीक बाद गाई जाती है; हर चौपाई के अर्थ के साथ चालीसा पढ़ें।
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सवाल-जवाब
गणेश आरती से जुड़े सवाल
गणेश आरती सबसे पहले क्यों गाई जाती है?
गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और हर पूजा में सबसे पहले पूजे जाते हैं, इसलिए उनकी आरती आमतौर पर शुरुआत में या कई आरतियों में सबसे पहले गाई जाती है।
गणेश आरती कब गाई जाती है?
पूजा की शुरुआत में, बुधवार को, संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय के बाद, और गणेश चतुर्थी में सुबह-शाम।