नक्षत्र 21 / 27 · Uttara Ashadha

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: नामाक्षर, चरण और स्वभाव

उत्तराषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 21वाँ है, 26°40′ धनु – 10° मकर तक, और इसके स्वामी सूर्य हैं। नामाक्षर: भे, भो, जा, जी।

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उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चरण और नामाक्षर

हर नक्षत्र के 3°20′ के चार चरण होते हैं। जिस चरण में जन्म के समय चंद्रमा हो, परंपरा से बच्चे का नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है। उत्तराषाढ़ा के लिए:

चरणअक्षरराशिनवांश
1भे Bheधनुधनु
2भो Bhoमकरमकर
3जा Jaमकरकुंभ
4जी Jiमकरमीन

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वभाव

सिद्धांतवादी, धैर्यवान और शांत रूप से शक्तिशाली, ईमानदारी से स्थायी जीत पाने वाले। आपकी सफलता अक्सर देर से आती है और टिकती है।

मनुष्य गण के जातक व्यावहारिक और संतुलित माने जाते हैं, सांसारिक जीवन में सहज।

जन्म के समय दशा

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्म हो, तो विंशोत्तरी दशा सूर्य से शुरू होती है, जिसकी पूरी अवधि 6 साल है। जन्म के समय कितनी बची है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था।

कुंडली मिलान में

गण, योनि और नाड़ी नक्षत्र से तय होते हैं और अष्टकूट मिलान के 36 में से 6, 4 और 8 अंक इन्हीं के हैं। दोनों की एक ही नाड़ी होना परंपरा में टाला जाता है।

कुंडली मिलान करें

नामाक्षर पारंपरिक अवकहड़ा चक्र के अनुसार हैं। कुछ अक्षरों की वर्तनी क्षेत्र के अनुसार बदलती है।

अपना जन्म नक्षत्र जानें

जन्म नक्षत्र वह है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। मुफ़्त जन्म कुंडली में जन्म विवरण डालें और चरण सहित अपना नक्षत्र देखें।

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सवाल-जवाब

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से जुड़े सवाल

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

चरण 1: भे, चरण 2: भो, चरण 3: जा, चरण 4: जी।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में है?

धनु (चरण 1) और मकर (चरण 2, 3, 4)। यह 26°40′ धनु – 10° मकर तक फैला है।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी और देवता कौन है?

स्वामी ग्रह सूर्य हैं और देवता विश्वेदेव (सार्वभौमिक देवता)।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण मनुष्य, योनि नकुल (नेवला) और नाड़ी अंत्य (कफ)। मनुष्य गण के जातक व्यावहारिक और संतुलित माने जाते हैं, सांसारिक जीवन में सहज।