नक्षत्र 7 / 27 · Punarvasu

पुनर्वसु नक्षत्र: नामाक्षर, चरण और स्वभाव

पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में 7वाँ है, 20° मिथुन – 3°20′ कर्क तक, और इसके स्वामी गुरु हैं। नामाक्षर: के, को, हा, ही।

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पुनर्वसु नक्षत्र के चरण और नामाक्षर

हर नक्षत्र के 3°20′ के चार चरण होते हैं। जिस चरण में जन्म के समय चंद्रमा हो, परंपरा से बच्चे का नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है। पुनर्वसु के लिए:

चरणअक्षरराशिनवांश
1के Keमिथुनमेष
2को Koमिथुनवृषभ
3हा Haमिथुनमिथुन
4ही Hiकर्ककर्क

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वभाव

आशावादी, दयालु और लचीले, कठिनाइयों के बाद फिर अच्छाई की ओर लौटने की क्षमता के साथ। घर और सरल आस्था आपके लिए मायने रखते हैं।

देव गण के जातक कोमल, उदार और आदर्शवादी माने जाते हैं।

जन्म के समय दशा

पुनर्वसु नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्म हो, तो विंशोत्तरी दशा गुरु से शुरू होती है, जिसकी पूरी अवधि 16 साल है। जन्म के समय कितनी बची है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था।

कुंडली मिलान में

गण, योनि और नाड़ी नक्षत्र से तय होते हैं और अष्टकूट मिलान के 36 में से 6, 4 और 8 अंक इन्हीं के हैं। दोनों की एक ही नाड़ी होना परंपरा में टाला जाता है।

कुंडली मिलान करें

नामाक्षर पारंपरिक अवकहड़ा चक्र के अनुसार हैं। कुछ अक्षरों की वर्तनी क्षेत्र के अनुसार बदलती है।

अपना जन्म नक्षत्र जानें

जन्म नक्षत्र वह है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। मुफ़्त जन्म कुंडली में जन्म विवरण डालें और चरण सहित अपना नक्षत्र देखें।

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सवाल-जवाब

पुनर्वसु नक्षत्र से जुड़े सवाल

पुनर्वसु नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

चरण 1: के, चरण 2: को, चरण 3: हा, चरण 4: ही।

पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में है?

मिथुन (चरण 1, 2, 3) और कर्क (चरण 4)। यह 20° मिथुन – 3°20′ कर्क तक फैला है।

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी और देवता कौन है?

स्वामी ग्रह गुरु हैं और देवता अदिति (देवमाता)।

पुनर्वसु नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

गण देव, योनि मार्जार (बिल्ली) और नाड़ी आदि (वात)। देव गण के जातक कोमल, उदार और आदर्शवादी माने जाते हैं।