नक्षत्र 8 / 27 · Pushya
पुष्य नक्षत्र: नामाक्षर, चरण और स्वभाव
पुष्य 27 नक्षत्रों में 8वाँ है, 3°20′ कर्क – 16°40′ कर्क तक, और इसके स्वामी शनि हैं। नामाक्षर: हु, हे, हो, डा।
पुष्य नक्षत्र के चरण और नामाक्षर
हर नक्षत्र के 3°20′ के चार चरण होते हैं। जिस चरण में जन्म के समय चंद्रमा हो, परंपरा से बच्चे का नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है। पुष्य के लिए:
| चरण | अक्षर | राशि | नवांश |
|---|---|---|---|
| 1 | हु Hu | कर्क | सिंह |
| 2 | हे He | कर्क | कन्या |
| 3 | हो Ho | कर्क | तुला |
| 4 | डा Da | कर्क | वृश्चिक |
पुष्य नक्षत्र का स्वभाव
पोषण करने वाले, समझदार और भरोसेमंद; सबसे शुभ नक्षत्रों में से एक। आप दूसरों का साथ देते हैं और सेवा व ज्ञान से बढ़ते हैं।
देव गण के जातक कोमल, उदार और आदर्शवादी माने जाते हैं।
जन्म के समय दशा
पुष्य नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्म हो, तो विंशोत्तरी दशा शनि से शुरू होती है, जिसकी पूरी अवधि 19 साल है। जन्म के समय कितनी बची है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था।
कुंडली मिलान में
गण, योनि और नाड़ी नक्षत्र से तय होते हैं और अष्टकूट मिलान के 36 में से 6, 4 और 8 अंक इन्हीं के हैं। दोनों की एक ही नाड़ी होना परंपरा में टाला जाता है।
नामाक्षर पारंपरिक अवकहड़ा चक्र के अनुसार हैं। कुछ अक्षरों की वर्तनी क्षेत्र के अनुसार बदलती है।
अपना जन्म नक्षत्र जानें
जन्म नक्षत्र वह है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। मुफ़्त जन्म कुंडली में जन्म विवरण डालें और चरण सहित अपना नक्षत्र देखें।
सवाल-जवाब
पुष्य नक्षत्र से जुड़े सवाल
पुष्य नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चरण 1: हु, चरण 2: हे, चरण 3: हो, चरण 4: डा।
पुष्य नक्षत्र किस राशि में है?
कर्क (चरण 1, 2, 3, 4)। यह 3°20′ कर्क – 16°40′ कर्क तक फैला है।
पुष्य नक्षत्र का स्वामी और देवता कौन है?
स्वामी ग्रह शनि हैं और देवता बृहस्पति (देवगुरु)।
पुष्य नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
गण देव, योनि मेष (भेड़) और नाड़ी मध्य (पित्त)। देव गण के जातक कोमल, उदार और आदर्शवादी माने जाते हैं।